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निजी अस्पताल में ताक पर रखे जा रहे नियम, लोगों की जान पर मंडरा रहा खतरा, अस्पतालों में आग की घटनाओं से राज्य सरकार नहीं सिख रही सबक

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मुंबई । भांडूप स्थित एक मॉल में चल रहे अस्पताल में दो साल पहले आग लगने से करीब 11 लोगों की मौत हो गई थी। इससे पहले ईएसआईसी अस्पताल में आग लगने से १४ से १५ लोगों की मौत हो गई थी। अस्पताल में इस तरह से आग लगने के कई मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि राज्य सरकार और मनपा प्रशासन और अब साथ ही म्हाडा इनसे बिल्कुल भी सबक नहीं सिख रही है। हालांकि इतना जरूर है कि ऐसी कोई घटना सामने आने पर कुछ दिनों तक तंत्र सक्रिय रहता है इसके बाद फिर से पूराना ढर्रा शुरू हो जाता है। इसी क्रम में अंधेरी पश्चिम में एक क्रिटीकेयर अस्पताल में नियमों को ताक पर रखते हुए अवैध निर्माण करके बेसमेंट में डायग्नोस्टिक सेंटर, बिलिंग, कैश, अकाउंट विभाग, एमआरआई, ब्लड बैक आदि चल रहा है। इसके चलते अस्पताल में आनेवाले मरीजों, चिकित्सकों और अन्य कर्मचारियों के जान पर खतरा मंडरा रहा है।

देश भर के अस्पतालों की सुरक्षा से लेकर अग्निरोधक उपकरणों आदि पर विशेष ध्यान देने की बड़ी जिम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकार की होती है। हालांकि इसके बावजूद कई जगहों पर आग समेत कई तरह की घटनाओं से लोगों की मौत हो जाती है। महाराष्ट्र राज्य रोगी सेवा व श्रमिक कामगार संगठन के राज्य सचिव भीमेश मुतुला ने कहा कि इसके बावजूद राज्य सरकार और मनपा प्रशासन की तरफ से निजी अस्पतालों पर खासा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। आलम यह है कि मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित क्रिटिकेयर अस्पताल में बड़े प्रमाण में अवैध निर्माण कर लोगों की जान को खतरे में डाला जा रहा है। वहीं उन्होंने म्हाडा अधिकारियों के समक्ष यह सिद्ध कर दिया है कि म्हाडा की इमारत रचना में आरक्षित दो बेसमेंट में बड़े प्रमाण में डीसीपीआर कानून का उल्लंघन करके अवैध निर्माणकार्य किया गया है। इसके साथ ही इमारत के पूरे सातों मंजिल पर अस्पताल शुरू किया गया है, जहां उसमे भी अवैध निर्माण किया गया है। इसके साथ ही यहां बेसमेंट में एमआरआई समेत कई परीक्षण मशीनें, डायग्नोस्टिक सेंटर, बिलिंग, नकदी, खाता विभाग, ब्लड बैंक अवैध रूप से शुरू किया गया है।

म्हाडा के अधिकारी नहीं कर रहे कार्रवाई

मुतुला ने आरोप लगाया कि तथ्य के सामने आने के बावजूद म्हाडा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कोई भी कार्रवाई नहीं की है। हालांकि मामला सामने आने के बाद म्हाडा अधिकारी को एमआरटीपी कानून की अवहेलना की कार्रवाई के साथ ही अन्य प्रावधानों के तहत कार्रवाई करना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि म्हाडा के अधिकारी अस्पताल प्रशासन के अवैध कामकाज में मदद करने का काम कर रहे हैं।

लाखों का लगा चुना

सक्षम स्वराज्य संस्थाओं को प्रत्येक निर्माणकार्य फुट के आधार पर भुगतान करना पड़ता है, जबकि इस मामले में अवैध निर्माण कर खाली जगह का उपयोग किया गया है। साथ ही म्हाडा को लाखों रुपए का चुना लगाया गया है। लेकिन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। इस मामले में मुतुला ने बार-बार म्हाडा अधिकारियों से संपर्क किया। साथ ही महाराष्ट्र प्रादेशिक और नगर रचना अधिनियम के अनुसार इमारत के दुरुपयोग को प्रतिबंधित करके कार्रवाई की मांग की है।

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