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Mercury crossed 37 in mumbai: दोपहर में निकलें संभलकर, मुंबई में पारा 37 के पार, राज्य में 42 डिग्री सेल्सियस

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मुंबई। मौसम (Season) के बदलते रूप ने अप्रैल महीने में ही भीषण गर्मी (corching heat) पड़ने के संकेत दे दिए हैं। (Mercury crossed 37 in mumbai) कल मुंबई में पारा 37 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया तो वहीं राज्य में पारा 42 डिग्री के आस-पास पहुंच गया। आगामी दिनों तपन और बढ़नेवाली है। मौसम वैज्ञानिकों ने ऊष्माघात के आघात से बचने के लिए लोगों सतर्क रहने की सलाह दी है और दोपहर में जरूरी न हो तो घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विभाग(Health Department) को भी अलर्ट कर दिया गया है।

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राज्य में मौसम अजीब तरह से करवट बदल रहा है। कहीं बेमौसम बारिश तो कहीं गर्मी लोगों को सता रही है। मौसम विभाग ने इस बार सामान्य से ज्यादा तापमान रहने का अनुमान जताया है। अप्रैल महीने में ही इतनी गर्मी पड़ रही है जबकि मई और जून का महीना बाकी है। मुंबई में अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है। कल सांताक्रुज में अधिकतम तापमान 37.1 डिग्री सेल्सियस और कुलाबा में 33.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। वहीं ठाणे-बेलापुर क्षेत्र में 41.2 डिग्री, दहानू 35.5 डिग्री, अलीबाग में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राज्य में सर्वाधिक तापमान सोलापुर में 41.8 डिग्री सेल्सियस रहा। डॉ. हेमंत जोशी बताते हैं कि इस बार गर्मी में लोगों को स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखना होगा क्योंकि इस बार पिछले वर्षों की तुलना में तापमान 5 डिग्री अधिक रहेगा। छोटे बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ख्याल रखा जाए। दोपहर 12 बजे शाम से चार बजे तक संभव हो तो घर से बाहर न निकलें। घर से बाहर निकलते समय पूरी सावधानी बरतें और लू के थपेड़ो से बचने का पर्याप्त उपाय करके ही बाहर जाएं। हीटस्ट्रोक घातक हो सकता है। महाराष्ट्र सरकार और मुंबई मनपा ने भी अलर्ट जारी किया है। खासकर खेत-खलिहान, ईंट भट्ठों, खनन, निर्माणकार्य कर्मचारियों और खुले में काम करनेवाले श्रमिकों पर विशेष ध्यान देने कहा गया है। स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है।

घातक है 37 डिग्री ऊपर का तापमान

विशेषज्ञों के अनुसार आमतौर पर दो तरह के हीट स्ट्रोक होते हैं। बाहर के तापमान में वृद्धि से गैर-श्रम तापघात होता है। जबकि बाहर के तापमान में वृद्धि होती है, लेकिन शरीर के तापमान में वृद्धि नहीं होती है, जिससे ऊष्माघात होता है।‌ जब बाहर का तापमान बढ़ता है, तो शरीर का कूलिंग सिस्टम शरीर के तापमान को नियंत्रित करने के लिए सक्रिय हो जाता है। जब बाहर का तापमान 45 डिग्री से ऊपर हो जाता है और पानी की कमी के कारण शरीर का कूलिंग सिस्टम बंद हो जाता है तो शरीर का तापमान 37 डिग्री से ऊपर उठने लगता है। जब शरीर का तापमान 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है तो व्यक्ति को लो ब्लड प्रेशर, चक्कर आना, उल्टी, डिहाइड्रेशन की समस्या का सामना करना पड़ता है। साथ ही, व्यक्ति के अंग धीरे-धीरे बंद हो जाते हैं और उसकी मृत्यु हो जाती है।

प्रेम, सौंदर्य, प्रकृति और जीवन के विभिन्न विषयों पर अविस्मरणीय कविता संग्रह है आत्मशारदा

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