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चाइल्ड सेक्स टूरिज्म का हब बन रहा केन्या !, मात्र एक डॉलर  के लिए बिकने को है मजबूर 

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KENYA। केन्या के मोम्बासा क्षेत्र में चाइल्ड प्रॉस्टिट्यूशन धीरे-धीरे स्वीकार्य होता जा रहा है। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केन्या में लगभग 100,000 चाइल्ड सेक्स वर्कर्स हो सकते हैं!  केन्या के तटीय इलाके चाइल्ड सेक्स टूरिज्म हब तौर पर कुख्यात हो चले हैं।

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यूनिसेफ की एक  रिपोर्ट  बताती है कि केन्या के तटीय क्षेत्रों में 12-18 वर्ष की आयु की लगभग 30 फीसद लड़कियां किसी न किसी रूप में प्रॉस्टिट्यूशन में शामिल हैं। यूनिसेफ का यह भी अनुमान है कि केन्याई सेक्स वर्कर्स में से 10 में से एक का यौन शोषण एडल्ट होने से पहले शुरू हो जाता है।

नाइट क्लब की जगमगाती रोशनी में चार गोरे प्रवेश करते हैं। डांसिंग फ्लोर पर लड़कियां नाच रही हैं कोंगोल्स रुंबा की धुन पर। जैसे-जैसे धुन तेज होती है वैसे-वैसे लड़कियों की थिरकन भी। अब उन चार फिरंगियों में से दो डांसिंग फ्लोर पर चढ़ जाते हैं। दोनों फ्लोर पर नाच रही एक-एक लड़कियों के साथ थिरकने लगते हैं और कुछ समय के बाद फ्लोर से उतरकर क्लब के पिछले रास्ते से बाहर निकल जाते हैं। वहां पर कार खड़ी है।  उनके दो बचे हुए साथी अन्य दो लड़कियों के साथ कार में बैठ जाते हैं। कार एक विला के सामने रूकती है। सभी कार से उतरकर विला के कमरों में चले जाते हैं।

शाम का वक्त है। बीच में यानी समंदर के किनारे रेत में टूरिस्ट का जमावड़ा लगा है। कुछ लोग हंस रहे हैं, ठहाके लगा रहे हैं, कुछ लोग समंदर में नहा रहे हैं। इस भीड़ के बीच में कुछ लड़कियां घूम रही हैं । समंदर में डुबकी लगाकर निकले दो टूरिस्ट जिनके हाथ में बियर की बोतलें हैं दो लड़कियों को बोतल ऑफर करते हैं। दोनों लड़कियां खुशी-खुशी से थैंक्स बोलते हुए बियर लेती हैं। चारों चलते हुए बीच में बने एक होटल के कमरे में पहुंच जाते हैं।

एक लड़की अपने टूटे-फूटे घर से बाहर निकलती है। तेजी से चलती हुई वह दुकान के सामने खड़ी हो जाती है। पैसे तो उसके पास नहीं है। दूसरी ओर एक अधेड़ उसे इशारे कर अपनी और बुलाता है। वह उसके साथ चली जाती है। कुछ समय बाद वह अधेड़ दुकानदार को पैसे देता है और वह लड़की उस दुकान से खाने की चीज खरीद कर अपने घर चली जाती है।

अफ्रीकी देश केन्या के अलग-अलग इलाकों के यह तीन दृश्य हमें विचलित कर सकते हैं। लेकिन वहां पर चाइल्ड प्रॉस्टिट्यूशन आम बन चुका है। गरीबी और महंगाई ने इन लोगों के जीवन को इतनी बुरी तरह तोड़ दिया है कि छोटी-छोटी उम्र की लड़कियां प्रॉस्टिट्यूशन का शिकार बन रही हैं। विडंबना तो देखिए यह लड़कियां अपने परिवार वालों की इजाजत से या उनके कहने पर इस व्यवसाय में आ गई हैं या फिर खुद घर के हालातों ने इन्हें मजबूर कर दिया है। यह सभी लड़कियां वह है जिन्होंने अपनी जिंदगी का सोलहवां भी नहीं देखा है। हालांकि कुछ स्वयं सेवी संस्थाएं लोकल एवं राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इन लड़कियों को बचाने के लिए काम कर रही हैं। लेकिन हालात सुधारते नजर नहीं आ रहे हैं। सरकार अपनी तरफ से पूरी ‘कोशिश’ कर रही है। यह इलाके अब सेक्स टूरिस्ट हब बनते जा रहे हैं।

इनमें से कई ऐसी भी लड़कियां हैं जो कभी पढ़ाई पूरी कर डॉक्टर या इंजीनियर बनने की ख्वाहिश रखती थीं लेकिन हालात ने उन्हें इस पेशे में धकेल दिया है। कुछ लड़कियां ऐसी भी है जो 18 साल की होने तक बच्चों की मां बन चुकी हैं। उनके बच्चों का पिता कौन है यह न उनकी मां जानती है और न वह बच्चे! लेकिन अब उन बच्चों को पालने के लिए उनके पास और कोई चारा भी नहीं। 100 से 500 सीलिंग यानी 1 से 5 डॉलर और ज्यादा से ज्यादा हजार सीलिंग यानी 10 डॉलर के लिए ये  लड़कियां हर प्रकार क जोखिम उठाने तैयार हैं। असुरक्षित सेक्स से बीमारियां, अनचाहे गर्भ और न जाने क्या-क्या परेशानियां इन्हें सब स्वीकार है ताकि उनको उनके और उनके परिवार को एक वक्त का खाना मिल जाए।

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