मुंबई: बदलापुर(Badlapur)की एक नामी स्कूल में दो मासूम बच्चियों पर हुए यौन शोषण के आरोपी अक्षय शिंदे का सोमवार को संदिग्ध एनकाउंटर(Suspicious encounter)कर दिया गया। इस घटना के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस एनकाउंटर का मकसद भाजपा के कुछ बड़े नेताओं को बचाना या सबूत मिटाना था। इस एनकाउंटर को लेकर गृह विभाग की कार्यशैली पर गंभीर संदेह जताया जा रहा है, और इस पर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
उधर, एनकाउंटर के बाद बदलापुर में शिंदे गुट के नेता वामन म्हात्रे ने मिठाई बांटकर विवाद को और बढ़ावा दिया। यह वही वामन म्हात्रे हैं जिन्होंने उक्त घटना को कवरेज के लिए गई महिला पत्रकार पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया था। इस पर शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता और युवासेना प्रमुख आदित्य ठाकरे ने शिंदे सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह “चोर शिंदे गुट” है। उन्होंने कहा कि वामन म्हात्रे को जेल में होना चाहिए था, न कि मिठाई बांटने का मौका मिलना चाहिए था।
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आदित्य ठाकरे ने आगे सवाल उठाया कि उन प्रदर्शनकारियों पर लगे आरोप कब हटाए जाएंगे, जिन्होंने इस मामले में न्याय की मांग करते हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि शिंदे सरकार ने इन प्रदर्शनकारियों के साथ गैंगस्टर जैसा व्यवहार किया है, जबकि असली अपराधियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
20 अगस्त को शिक्षा संस्थान में हुए यौन शोषण के बाद नागरिकों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान वामन म्हात्रे ने एक महिला पत्रकार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इस घटना के बाद उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की गई या नहीं, यह भी एक बड़ा सवाल बना हुआ है।



