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…बस उड़ान में हौंसला चाहिए

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नवी मुंबई। वर्ष 2015 में जब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकलांगों को दिव्यांग कहकर पुकारा था। उस दिन समाज में दिव्यांगों के प्रति एक नई विचारधारा का बीजारोपणकिया गया था, लेकिन वह बीज आज भी वह फल नहीं दे सका है, जिसकी उम्मीददिव्यांगों ने लगा रखी थी। आज हम चाँद पर पहुँच गए हैं, लेकिन हमारीविचारधारा आज भी रूढ़िवादी ही है। हमारे समाज में आज भी दिव्यांगों को हेय दृष्टिसे देखा जाता है। इस बात को झुठलाया नहीं जा सकता है कि आज भी विकलांगता वह अभिशापहै, जो व्यक्ति को समाज की मूलधारा से अलग कर देता है। निरपराध होने केबावजूद भी इन्हें इस तरह से देखा जाता है कि इन्होंने कोई बहुत बड़ा पाप कर दियाहै। दूर-दराज गाँवों में तो इसे ‘पूर्व जन्म का पाप’ तककह दिया जाता है। हालाँकि यह सच है कि लोग कुछ हद तक जागरूक हुए हैं, लेकिनउनका अनुपात न के बराबर है। इन सभी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद भी न जानेकितने ही दिव्यांगों ने अपनी क्षमता और योग्यता को एक नहीं कई बार साबित किया है।खेल, शिक्षा, विज्ञान हर क्षेत्र में उन्होंने ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है,जिसकेबारे में सुनकर हम दाँतों तले उँगली दबा लेते हैं। अरुणिमा सिन्हा, रवींद्रजैन, डॉ. सुरेश अडवाणी, सुधा चंद्रन, इरा सिंघल,  शीतल देवी जैसे अनगिनत नाम हैं,जिन्होंनेअपनी कमजोरियों को अपनी ताकत बनाई और दुनिया को बताया कि मंजिल खुद ही ढूँढ़ लेताहै परिंदा, बस उड़ान में हौंसला चाहिए।

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सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार कीआधिकारिक वेबसाइट पर मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना केअनुसार भारत में 121 करोड़ की आबादी में से 2.68 करोड़ व्यक्ति ‘दिव्यांग’हैंजो कुल जनसंख्या का 2.21% है। दिव्यांग जनसंख्या में 56%(1.5करोड़) पुरुष हैं और 44% (1.18 करोड़) महिलाएँ हैं। इन दिव्यांगोंमें 69% ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जबकि शेष 31% शहरी क्षेत्रोंमें रहते हैं
 जनसंख्या में हो रही वृद्धि
प्राप्त सरकारी आँकड़ों के अनुसार कुल जनसंख्या में दिव्यांगव्यक्तियों का प्रतिशत 2001 में 2.13% से बढ़कर 2011में 2.21% हो गया। ग्रामीण क्षेत्रों में, 2001 में 2.21% सेबढ़कर 2011 में 2.24% हो गया, जबकि शहरी क्षेत्रों में, इस अवधि के दौरान, यह 1.93% सेबढ़कर 2.17% हो गई। संभव है कि वर्तमान समय में यह आँकड़ा और बढ़ चुका हो,जोआगामी जनगणना में सामने आ सकता है।
आयु वर्ग के अनुसार दिव्यांगता
भारत में 20% दिव्यांग व्यक्ति चलने-फिरने मेंअक्षम हैं। 19% दृष्टि बाधित दिव्यांग हैं और अन्य 19% श्रवण बाधितदिव्यांग हैं। इसके अतिरिक्त 8% एकाधिक दिव्यांगता अर्थात एक से अधिकप्रकार से दिव्यांग वाले व्यक्ति हैं। दिव्यांग व्यक्तियों की संख्या 10-19वर्ष के आयु वर्ग में सबसे अधिक (46.2 लाख) है। दिव्यांग जनसंख्या का 17%हिस्सा 10-19 वर्ष के आयु वर्ग से है और 16% हिस्सा 20-29वर्ष के आयु वर्ग से हैं। अखिल भारतीय स्तर पर कुल दिव्यांग व्यक्तियों में वृद्ध(60+ वर्ष) दिव्यांग 21% हैं। कामगार जनसंख्या अनुपात
2011 की जनगणना के अनुसार गैर-कामगार दिव्यांगों की जनसंख्या 1.7करोड़ है। कुल दिव्यांग गैर-कामगारों में लगभग 46% 15-59 वर्ष के आयुवर्ग के हैं, जबकि 31% 0-14 वर्ष के आयु वर्ग के हैं। 60+ वर्षके गैर-कामगार दिव्यांगों का आँकड़ा 23% बताया जाता है। शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र मे कार्यरत टारगेट पब्लिकेशन की प्रबंध निदेशक डॉ कल्पना गंगारमानी बताती है कि दिव्यांगों के साथ भेदभाव करना बेहद शर्मनाक है। दिव्यांग हमारे हीसमाज का हिस्सा हैं। वे हमारी तरह ही आम नागरिक हैं, उन्हें भी समाजमें हमारी तरह ही जीने का पूरा अधिकार हैं। उनके साथ दुर्व्यवहार करना अनुचित है।दिव्यांगों के साथ किया जाने वाला भेदभाव एक शिक्षित और विकसित समाज के माथे परकलंक है।

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