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New education policy implemented from June 2023: राज्य में इसी साल से लागू होगी, नई शिक्षा नीति! मराठी में मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई प्रदेश के स्कूल शिक्षा मंत्री ने दी जानकारी

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मुंबई। नए शैक्षणिक साल २०२३-२४ यानी जून से ही राज्य में नई शिक्षा नीति (New education policy implemented from June 2023) का क्रियान्वयन कर दिया जाएगा। यह जानकारी स्कूल शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर (School Education Minister Deepak Kesarkar)ने दी है। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी समय में मेडिकल और इंजीनियरिंग के पाठ्यक्रम (Medical and Engineering courses) मराठी में पढ़ाए जाएंगे।
उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार(Central government) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy)को मंजूरी दे दी है। करीब 34 साल के बाद देश में नई शिक्षा नीति लागू होने जा रही है। इसके माध्यम से देश की पारंपरिक शिक्षा पद्धति (Traditional education system)में कई बड़े बदलाव होने का अनुमान है। देश में कई साल से स्कूल शिक्षा का १०+२ जैसे स्वरूप में था। हालांकि नई नीति की भी स्वरूप बदल दिया गया है। उसके बदले नई व्यवस्था के तहत ५+३+३+४ को लागू किया जाएगा। इसमें पूर्व प्राथमिक तीन साल नर्सरी से लेकर दूसरी तक इस तरह पांच वर्ष तीसरी से पांचवीं, छठीं और नौवीं से बारहवीं इस तरह वर्गीकरण तैयार किया गया है।

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साल में दो बार बोर्ड परीक्षा

शिक्षा मंत्री दीपक केसरकर ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुसार बोर्ड की परीक्षा के महत्व को कम करने के लिए सेमेस्टर पैटर्न लागू करने का सुझाव दिया गया है। वर्तमान में बोर्ड की परीक्षा साल में एक बार ही होती है। लेकिन अगले साल से दो बार सेमेस्टर पैटर्न के तहत परीक्षा ली जाएगी। मतलब नए साल से 12वीं तक की शिक्षा 8 सेमेस्टर में बांटा गया है। उन्होंने कहा कि कालेजों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा लेने पर भी विचार किया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति की विशेषताएं

– 10+2 की जगह अब 5+3+3+4 शिक्षा का पैटर्न
– कक्षा पांच तक की शिक्षा मातृभाषा, क्षेत्रीय या घरेलू भाषा में
– पूर्व प्राथमिक शिक्षा को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने का प्रयास
– 6वीं से व्यावसायिक शिक्षा का समावेश
– छात्र स्वयं का मूल्यांकन खुद अथवा साथी छात्र, शिक्षकों करेंगे
– शिक्षा के बाद छात्रों को व्यावसायिक कौशल प्रदान करने पर जोर
– डिग्री के लिए कला और विज्ञान के बीच भेद किए बिना विषय चुनने का विकल्प
– सरकारी और निजी स्कूलों के बीच शिक्षा में समानता

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