जोइंडिया टीम/ मुंबई: अरावली पर्वतमाला (Aravalli mountain range) को लेकर जारी विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के ताज़ा फैसले ने देशभर में नई बहस छेड़ दी है। सोमवार को शीर्ष अदालत ने अपने ही पहले के आदेश पर अस्थायी रोक लगाते हुए बड़ा कदम उठाया है। गौरतलब है कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने 100 मीटर से छोटी पहाड़ियों पर खनन की अनुमति देने का आदेश जारी किया था
सुप्रीम कोर्ट की रोक पर आदित्य ठाकरे की तीखी प्रतिक्रिया
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद शिवसेना (UBT) नेता और पूर्व पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। आदित्य ठाकरे ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह फैसला भले ही राहत देने वाला है, लेकिन इसे स्थायी सुरक्षा में बदला जाना बेहद जरूरी है।
The stay order from the Hon’ble Supreme Court for the Aravalli Range is a huge but temporary relief. It’s important to seal this permanently.
This wasn’t possible without the mass movement of citizens in Rajasthan, who showed that what matters is our planet, not the dirty…
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) December 29, 2025
आदित्य ठाकरे ने लिखा, “माननीय सुप्रीम कोर्ट का अरावली रेंज पर स्टे ऑर्डर एक बड़ी लेकिन अस्थायी राहत है। इसे स्थायी रूप से सील करना ज़रूरी है। यह राजस्थान के नागरिकों के जन आंदोलन के बिना संभव नहीं था, जिन्होंने दिखाया कि हमारे ग्रह की रक्षा करना ज़रूरी है, न कि उन लोगों के गंदे इरादे जो ग्रह का शोषण करना चाहते हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि अरावली पर्वतमाला और पूरे देश में प्रकृति को सबसे मजबूत कानूनी सुरक्षा दिए जाने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने उस कथित गलत सूचना अभियान पर भी सवाल उठाए, जिसमें यह दावा किया जा रहा है कि अरावली पूरी तरह सुरक्षित है। आदित्य ठाकरे के अनुसार, “अरावली सुरक्षित नहीं है, क्योंकि सरकार इसे फिर से परिभाषित कर बेचने की कोशिश कर रही है।”
नासिक दौरे में भी दिखा पर्यावरण का मुद्दा
गौरतलब है कि हाल ही में आदित्य ठाकरे नासिक दौरे पर भी गए थे। इस दौरान उन्होंने नासिक के तपोवन इलाके का दौरा किया और वहां चल रहे पर्यावरणविदों के आंदोलन का खुलकर समर्थन किया।
आज नाशिकमधील तपोवन येथे भेट देऊन पर्यावरण प्रेमी, स्थानिकांशी संवाद साधला. तसेच ‘जागरूक नाशिककर नागरिक’ व इतर पर्यावरणप्रेमी संघटना, स्थानिकांनी दिलेले निवेदन स्वीकारले.
तपोवन- ‘green zone’ नष्ट करून तेथे ‘yellow zone’ उभारण्यास पर्यावरण प्रेमींसोबत स्थानिकांचाही स्पष्ट विरोध… pic.twitter.com/WpLMG9iYDy
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) December 27, 2025
दरअसल, नासिक में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले की तैयारियों के तहत तपोवन क्षेत्र में साधुग्राम विकसित करने की योजना है, जिसके लिए करीब 1800 पेड़ों को काटने का प्रस्ताव है। इस फैसले का पर्यावरणविदों और स्थानीय नागरिकों द्वारा विरोध किया जा रहा है।
बीजेपी पर निशाना, आंदोलन को समर्थन
आदित्य ठाकरे ने तपोवन में पेड़ों की कटाई के मुद्दे पर बीजेपी पर तीखा हमला करते हुए कहा कि विकास के नाम पर प्रकृति का विनाश स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने साफ किया कि धार्मिक आयोजन और पर्यावरण संरक्षण को आमने-सामने खड़ा करना गलत है और ऐसे विकास मॉडल की जरूरत है, जिसमें प्रकृति के साथ संतुलन बना रहे।
पर्यावरण बनाम विकास की बहस तेज
अरावली पर्वतमाला पर खनन को लेकर सुप्रीम कोर्ट की रोक और नासिक में पेड़ कटाई का मुद्दा एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर रहा है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। आदित्य ठाकरे के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर और तेज़ होने वाला है।



