जोइंडिया टीम/ मुंबई: नासिक में प्रस्तावित कुंभ मेले की तैयारियों के बीच तपोवन इलाके में साधुग्राम निर्माण की योजना अब बड़े सियासी और पर्यावरणीय टकराव का कारण बन गई है। करीब 1800 पेड़ों की संभावित कटाई के फैसले ने पर्यावरणविदों को सड़क से लेकर अदालत तक उतरने पर मजबूर कर दिया है। इसी मुद्दे पर आज शिवसेना (UBT) के नेता और सांसद आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray)
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यकर्ताओं से बातचीत के बाद आदित्य ठाकरे ने सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दो टूक कहा कि कुंभ मेले से किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन उसके नाम पर पेड़ों का कत्लेआम किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक, विकास वही है जो प्रकृति के साथ संतुलन बनाए, न कि हरियाली को कुचलकर आगे बढ़े।
आदित्य ठाकरे ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार नासिक में सुनियोजित तरीके से हरित क्षेत्रों को खत्म कर रही है। उन्होंने कहा कि शहर में विकास नहीं बल्कि ‘रावण राज’ थोपा जा रहा है, जहां जनता और पर्यावरण की कीमत पर ठेकेदारों और बिल्डरों के हित साधे जा रहे हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी उन्होंने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। ठाकरे ने लिखा कि तपोवन जैसे संवेदनशील क्षेत्र में ग्रीन ज़ोन को हटाकर येलो ज़ोन घोषित करने की साज़िश रची जा रही है। उनके अनुसार, ‘जागरूक नासिककर नागरिक’ समेत कई पर्यावरण संगठन और स्थानीय लोग इस फैसले के खिलाफ खुलकर सामने आ चुके हैं।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर ग्रीन बेल्ट को मिटाकर उसे चुनिंदा लोगों के मुनाफे का ज़रिया बनाने की कोशिश को शिवसेना (UBT) किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।
आज नाशिकमधील तपोवन येथे भेट देऊन पर्यावरण प्रेमी, स्थानिकांशी संवाद साधला. तसेच ‘जागरूक नाशिककर नागरिक’ व इतर पर्यावरणप्रेमी संघटना, स्थानिकांनी दिलेले निवेदन स्वीकारले.
तपोवन- ‘green zone’ नष्ट करून तेथे ‘yellow zone’ उभारण्यास पर्यावरण प्रेमींसोबत स्थानिकांचाही स्पष्ट विरोध… pic.twitter.com/WpLMG9iYDy
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) December 27, 2025
आदित्य ठाकरे ने यह भी स्पष्ट किया कि इस आंदोलन में पार्टी पूरी मजबूती से खड़ी रहेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे खुद और पार्टी प्रमुख माननीय उद्धव ठाकरे तपोवन को बचाने की इस लड़ाई में पर्यावरणविदों और नासिक के नागरिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहेंगे।
आज तपोवन केवल एक भूखंड नहीं रहा, बल्कि वह नासिक में विकास बनाम पर्यावरण की लड़ाई का प्रतीक बन चुका है। अब बड़ा सवाल यही है— क्या कुंभ मेले की तैयारियों की आड़ में हरियाली को खत्म कर दिया जाएगा, या जनता का विरोध सत्ता को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर करेगा?



