राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर पर्नोड रिकार्ड इंडिया फाउंडेशन (पीआरआईएफ) के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट ‘रफ्तार’ (Raftaar Project) ने अपने तीन सफल वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह पहल महाराष्ट्र (Maharashtra) के नासिक (Nashik) ज़िले के दिंडोरी तालुका में आदिवासी बच्चों और युवाओं के लिए खेल को अवसर और आत्मविश्वास का माध्यम बना रही है।
ब्रिजेस ऑफ स्पोर्ट्स फाउंडेशन के सहयोग से संचालित यह संरचित एथलेटिक ट्रेनिंग प्रोग्राम तालेगांव, अवनखेड और करंजी गांवों में 14 वर्ष से कम उम्र के आदिवासी बच्चों के लिए लागू किया गया है। अब तक ‘रफ्तार’ के ज़रिए सामुदायिक खेल आयोजनों के माध्यम से 1,600 से अधिक ट्राइबल बच्चों तक पहुँच बनाई जा चुकी है। इनमें से 531 बच्चों को नियमित ट्रेनिंग दी गई, जबकि 20 युवा एथलीटों को स्प्रिंटिंग में विशेष प्रशिक्षण मिला है। खास बात यह है कि कार्यक्रम के टॉप परफॉर्मर्स में 50 प्रतिशत लड़कियाँ शामिल हैं, जो जेंडर इक्वलिटी और बढ़ते आत्मविश्वास का मजबूत संकेत है।
भारत में संगठित खेलों तक पहुँच की चुनौतियों को देखते हुए ‘रफ्तार’ का महत्व और बढ़ जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में 35 साल से कम उम्र के केवल 1% युवा ही ऑर्गनाइज़्ड स्पोर्ट्स का हिस्सा बन पाते हैं, जबकि महिलाओं की भागीदारी 29% तक सीमित है। दिंडोरी जैसे ट्राइबल इलाकों में संसाधनों की कमी, खेल प्रशिक्षकों का अभाव और सामाजिक बाधाएँ इस अंतर को और गहरा कर देती हैं—खासकर लड़कियों के लिए।
2022 में शुरू हुए प्रोजेक्ट रफ्तार की नींव 20 से अधिक प्राइमरी स्कूलों में किए गए स्पोर्ट्स इकोसिस्टम असेसमेंट और शिक्षकों, माता-पिता व बच्चों से बातचीत के आधार पर रखी गई थी। यह प्रोग्राम फिटनेस टेस्ट के ज़रिए प्रतिभा की पहचान करता है और चयनित बच्चों को नियमित कोचिंग, स्पोर्ट्स किट और न्यूट्रिशन सपोर्ट उपलब्ध कराता है। बेहतर प्रदर्शन करने वाले एथलीटों को एडवांस ट्रेनिंग और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में भाग लेने का मौका भी मिलता है।
पिछले तीन वर्षों में ‘रफ्तार’ के तहत 300 से अधिक ट्रेनिंग सेशन आयोजित किए गए हैं। साथ ही, कम्युनिटी से चुने गए 9 लोकल कोचों को प्रशिक्षित कर स्थानीय क्षमता को मजबूत किया गया है, जिससे इस पहल की निरंतरता सुनिश्चित हुई है। इस प्रोग्राम से जुड़े एथलीट अब तक ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर 50 से अधिक मेडल जीत चुके हैं—जबकि प्रोग्राम से पहले यह संख्या सिर्फ एक मेडल तक सीमित थी।
पर्नोड रिकार्ड इंडिया के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट गगनदीप सेठी के अनुसार,
“समान अवसर और सहभागिता हमारे विज़न का अहम हिस्सा हैं। ‘रफ्तार’ के ज़रिए हम ट्राइबल युवाओं को खेलों में व्यवस्थित पहुँच दे रहे हैं और महाराष्ट्र के ट्राइबल क्षेत्रों में लोकल कोचिंग इकोसिस्टम को मज़बूत कर रहे हैं।”
इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूती देने के उद्देश्य से करंजी के गुरुकुल स्कूल में कम्युनिटी स्पोर्ट्स जिम-कम-एक्टिविटी रूम की स्थापना की गई है, जिससे स्कूल और आसपास की कम्युनिटी के बच्चों को नियमित ट्रेनिंग की सुविधाएँ मिल रही हैं।
आगे चलकर ‘रफ्तार’ का लक्ष्य है कि ज़्यादा से ज़्यादा ट्राइबल युवा राष्ट्रीय खेल अकादमियों, खेल से जुड़े करियर और सशस्त्र बलों जैसे क्षेत्रों तक पहुँच बना सकें, साथ ही कम्युनिटी-लीड पहलों को और सशक्त किया जा सके। खेलों के ज़रिए भविष्य गढ़ने की यह रफ्तार अब और तेज़ होती दिखाई दे रही है।



