जो इंडिया / मुंबई: 125 साल पुराने कर्नाक ब्रिज का पुनर्निर्माण (Rebuilding the Karnak Bridge

स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले तो टेंडर, कंपनी चयन और निर्माण में देरी होती है, और जब काम पूरा हो जाता है तो नेताओं के फुर्सत मिलने तक इंतज़ार करना पड़ता है। सवाल यह उठ रहा है कि जब जनता टैक्स देती है तो सुविधाएं देने में इतनी राजनीति क्यों?
📍 रेलवे और ट्रैफिक की मंजूरी के बाद भी बंद
इस पुल के निर्माण के लिए रेलवे की एनओसी और ट्रैफिक पुलिस की मंजूरी पहले ही मिल चुकी है। इसके बावजूद, जनता को उद्घाटन का इंतजार करना पड़ रहा है।
📍 इतिहास और निर्माण कार्य
अगस्त 2022 में 125 साल पुराने कर्नाक ब्रिज को जर्जर हालत के चलते ध्वस्त किया गया था। मस्जिद बंदर के पूर्व और पश्चिम हिस्सों को जोड़ने वाले इस ब्रिज का पुनर्निर्माण मनपा ने हाथ में लिया और रेलवे द्वारा अनुमोदित नक्शे के अनुसार इसे तैयार किया।
328 मीटर लंबे इस ब्रिज में 70 मीटर का हिस्सा रेलवे की सीमा में और बाकी हिस्सा मनपा क्षेत्र में आता है। रेलवे ट्रैक के ऊपर 550 मीट्रिक टन की दो विशाल स्टील गार्डर आरसीसी पायों पर लगाई गई हैं। आरसीसी डेक स्लैब, डामरीकरण और संपर्क मार्गों का काम भी पूरा हो चुका है।
📍 जनता का सवाल: टैक्स देने के बाद भी इंतजार क्यों?
स्थानीय निवासियों का कहना है,
> “रेलवे और मनपा दोनों ने काम कर दिया, अब नेता लोग उद्घाटन करने की अपनी मर्जी से तारीख तय करेंगे। लेकिन तकलीफ जनता को हो रही है। हर रोज ट्रैफिक में फंसना पड़ रहा है। अगर काम पूरा हो गया है तो जनता के लिए ब्रिज खोल देना चाहिए।”
📍 शहर के अन्य ब्रिज भी अधूरे
गौरतलब है कि मझगांव का हैनकॉक ब्रिज और गोरेगांव का मृणालताई गोरे फ्लाईओवर जैसे कई अन्य ब्रिज अभी भी निर्माणाधीन हैं। ऐसे में जिन ब्रिज का काम पूरा हो चुका है, उन्हें भी खोला नहीं जाना जनता के धैर्य की परीक्षा ले रहा है
