जो इंडिया / मुंबई : (Seven Hills Hospital Mumbai)
देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में एक बार फिर मनपा प्रशासन का एक बड़ा फैसला राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है। चर्चित सेवन हिल्स अस्पताल को लेकर अब एक नया विवाद खड़ा हो गया है। सूत्रों के मुताबिक, मुंबई महानगरपालिका की 21 मई 2026 को होने वाली सुधार समिति (इम्प्रूवमेंट कमेटी) की बैठक में एक अहम प्रस्ताव पेश किया जाने वाला है, जिसके तहत सेवन हिल्स अस्पताल का संचालन उद्योगपति मुकेश अंबानी के समूह को सौंपने की प्रक्रिया पर मुहर लग सकती है।
बताया जा रहा है कि यह सौदा मामूली दरों पर करीब 30 वर्षों के लिए किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो मुंबई मनपा की हजारों करोड़ रुपये मूल्य की सार्वजनिक स्वास्थ्य संपत्ति निजी हाथों में चली जाएगी। इस खबर के सामने आते ही राजनीतिक गलियारों से लेकर स्वास्थ्य क्षेत्र तक हलचल तेज हो गई है।
पहले ही मिल चुकी थी प्रशासनिक मंजूरी?
सूत्रों का दावा है कि इस प्रस्ताव को प्रशासनिक स्तर पर काफी पहले से आगे बढ़ाया जा चुका था। जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में ही बीएमसी प्रशासन द्वारा इस संबंध में अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर दिया गया था।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासनिक मंजूरी पहले ही दी जा चुकी थी, तो फिर इसे सुधार समिति के सामने औपचारिक स्वीकृति के लिए क्यों लाया जा रहा है? क्या यह सिर्फ प्रक्रिया पूरी करने की कवायद है या फिर इसके पीछे कोई बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक समीकरण काम कर रहा है?
गरीबों के लिए सिर्फ 20 प्रतिशत बेड?
सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित समझौते में अस्पताल के केवल 20 प्रतिशत बेड गरीब मरीजों के लिए आरक्षित रखने की बात कही गई है। इसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
मुंबई जैसे महानगर में जहां सरकारी अस्पतालों पर पहले से ही भारी दबाव है, वहां इतने बड़े सार्वजनिक अस्पताल का संचालन निजी समूह को सौंपना स्वास्थ्य व्यवस्था के निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों का कहना है कि यदि यह अस्पताल पूरी तरह कॉर्पोरेट मॉडल पर चला, तो आम और गरीब मरीजों के इलाज पर असर पड़ सकता है।
कोविड काल में अहम भूमिका निभा चुका है अस्पताल
सेवन हिल्स अस्पताल कोविड-19 महामारी के दौरान मुंबई के प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों में शामिल रहा था। कोरोना संकट के समय यहां हजारों मरीजों का इलाज किया गया था। ऐसे में इस अस्पताल को लेकर लिए जा रहे किसी भी निर्णय को सार्वजनिक हित से जोड़कर देखा जा रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक अस्पताल का मामला नहीं है, बल्कि मुंबई की सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का भविष्य भी इससे जुड़ा हुआ है।
विपक्ष ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
कांग्रेस नेता राजेश शर्मा ने इस प्रस्ताव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि मनपा की इतनी बड़ी संपत्ति को निजी समूह को सौंपने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।
विपक्ष का आरोप है कि इस मामले में जनता और जनप्रतिनिधियों को पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई। साथ ही यह भी पूछा जा रहा है कि क्या इस परियोजना के लिए खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई गई थी या नहीं।
राजनीतिक दलों का कहना है कि यदि सार्वजनिक संपत्तियों को लंबे समय के लिए निजी कंपनियों को सौंपा जाता है, तो उसके सामाजिक और आर्थिक प्रभावों पर व्यापक चर्चा जरूरी है।
21 मई की बैठक बनी निर्णायक
अब पूरे मामले में 21 मई 2026 को होने वाली सुधार समिति की बैठक बेहद अहम मानी जा रही है। माना जा रहा है कि इसी बैठक में इस प्रस्ताव पर अंतिम चर्चा और निर्णय हो सकता है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो यह मुंबई मनपा के इतिहास के सबसे चर्चित स्वास्थ्य सौदों में शामिल हो सकता है। वहीं दूसरी ओर विपक्ष इस मुद्दे को लेकर बड़े आंदोलन की तैयारी में भी जुट गया है।
फिलहाल बीएमसी प्रशासन या संबंधित पक्षों की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन मुंबई की राजनीति और स्वास्थ्य व्यवस्था में इस मुद्दे ने पहले ही बड़ा भूचाल ला दिया है।



