Aaditya Thackeray ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मुंबई की जर्जर इमारतों और पुनर्विकास (Mumbai Building Redevelopment) के मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis को एक कड़ा पत्र लिखा। सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा करते हुए आदित्य ठाकरे ने कहा कि मुंबई में सेस और नॉन-सेस इमारतों में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी खतरे में है, लेकिन सरकार अब तक सिर्फ बैठकों और घोषणाओं तक सीमित है।
आदित्य ठाकरे ने अपने पत्र में लिखा कि महाविकास अघाड़ी सरकार के दौरान पुराने और जर्जर भवनों के पुनर्विकास को तेज करने के लिए कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किए गए थे, ताकि वर्षों से अटकी परियोजनाओं को गति मिल सके। लेकिन सरकार बदलने के बाद इन फैसलों पर कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें खड़ी हो गईं, जिसके कारण हजारों इमारतों का पुनर्विकास अधर में लटक गया है।
आज मुख्यमंत्री मा. श्री. देवेंद्र फडणवीस ह्यांना सेस व नॉन सेस इमारतींच्या पुनर्विकास आणि भाडेकरूंच्या समस्यांबाबत पत्र देऊन, ह्या इमारतींच्या दुरुस्ती व डागडुजीसाठी मुख्यमंत्री विशेष अधिकारातून येत्या पावसाळ्यापूर्वी तातडीने निधी उपलब्ध करण्याविषयी, आठवण करून दिली. pic.twitter.com/l7llNxPNKV
— Aaditya Thackeray (@AUThackeray) May 7, 2026
उन्होंने आरोप लगाया कि हर साल मानसून आते ही मुंबई में इमारत गिरने की घटनाएं सामने आती हैं, कई परिवार बेघर हो जाते हैं और कई लोगों की जान तक चली जाती है, लेकिन सरकार स्थायी समाधान निकालने के बजाय सिर्फ हादसों के बाद संवेदनाएं व्यक्त करती है। ठाकरे ने कहा कि मुंबई के भाड़ेदार और पुराने मकानों में रहने वाले नागरिक आज भी असुरक्षा के साये में जीने को मजबूर हैं।
पत्र में आदित्य ठाकरे ने मुख्यमंत्री से मांग की कि आगामी मानसून से पहले मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार कोष से तुरंत फंड जारी किया जाए, ताकि जर्जर इमारतों की मरम्मत और आवश्यक रखरखाव का काम युद्धस्तर पर शुरू किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जिन इमारतों का पुनर्विकास कोर्ट केस या प्रशासनिक प्रक्रियाओं में फंसा हुआ है, उनके लिए अलग से विशेष नीति बनाई जाए।
शिवसेना-उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने इसे मुंबईकरों की सुरक्षा से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार को चेतावनी दी कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले मानसून में हालात और भयावह हो सकते हैं। आदित्य ठाकरे ने अपने पत्र के जरिए यह साफ संकेत दिया है कि विपक्ष अब मुंबई की जर्जर इमारतों और पुनर्विकास के मुद्दे पर सरकार को घेरने की पूरी तैयारी में है।



