जो इंडिया / मुंबई: (Cyber Crime Senior Citizens)
मुंबई में “डिजिटल अरेस्ट” (“Digital Arrest”) के मामले अब नए खतरनाक स्तर पर पहुंच गए हैं। साइबर अपराधियों ने शहर के सीनियर सिटीजन को निशाना बनाकर अब तक करीब 100 करोड़ रुपये की ठगी कर डाली है। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 तक कुल 128 डिजिटल अरेस्ट केस दर्ज किए जा चुके हैं।
बुजुर्ग बने ठगों का आसान निशाना
साइबर गैंग विशेष रूप से उन बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं जो घर में अकेले रहते हैं या जिनके बच्चे विदेश में हैं। ऐसे लोगों के पास रिटायरमेंट के बाद जीवनभर की कमाई होती है, जिसे अपराधी अपनी चालाकी से लूट रहे हैं। ठग खुद को सीबीआई, ईडी या क्राइम ब्रांच अधिकारी बताकर वीडियो कॉल या फोन पर “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाते हैं और लाखों-करोड़ों रुपये वसूलते हैं।
पुलिस ने अब शुरू की जागरूकता मुहिम
लंबे समय तक चुप रहने के बाद आखिरकार मुंबई पुलिस की नींद खुली है। डीसीपी जोन 9 के तहत 29 पुलिस अधिकारियों की विशेष टीम बनाई गई है। इस टीम ने अब तक 847 से अधिक सीनियर सिटीजन के घर जाकर उन्हें डिजिटल अरेस्ट और साइबर फ्रॉड से बचने की जानकारी दी है।
पुलिस अफसरों ने बुजुर्गों को बताया कि —
> “सीबीआई, ईडी या क्राइम ब्रांच किसी को भी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती, न ही ऐसा कोई कानून मौजूद है।”
उन्होंने सलाह दी कि अनजान नंबर से वीडियो कॉल या लिंक क्लिक न करें, और किसी भी स्थिति में निजी जानकारी या बैंक डिटेल साझा न करें।
अब तक के बड़े केस
मार्च 2025: 86 वर्षीय महिला से 20 करोड़ रुपये की ठगी, खुद को ईडी अधिकारी बताकर किया गया डिजिटल अरेस्ट।
अक्टूबर 2025: 72 वर्षीय बिज़नेसमैन कपल को 40 दिन तक मानसिक बंधक बनाकर 58 करोड़ रुपये की ठगी की गई। ठगों ने कपल को मानसिक रूप से इतना डराया कि वे अपनी सारी संपत्ति गंवा बैठे।
अगस्त 2025: 81 वर्षीय महिला को उच्च रिटर्न निवेश योजना का लालच देकर 7.8 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई।
साइबर पुलिस की चेतावनी
साइबर पुलिस के मुताबिक, अपराधी उन लोगों को निशाना बना रहे हैं जो सेवानिवृत्त हैं, सर्विस फंड पा चुके हैं या जिनके बच्चे विदेशों में हैं। इन बुजुर्गों के खातों में बड़ी रकम होती है, जिसे ठग विभिन्न तरीकों से हड़प लेते हैं।
अब जरूरी है — जागरूकता ही सुरक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में सतर्कता ही सुरक्षा है। किसी भी सरकारी संस्था या बैंक द्वारा फोन, वीडियो कॉल या लिंक के माध्यम से कोई कार्रवाई नहीं की जाती। बुजुर्गों को सलाह दी जा रही है कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।



