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BMC corruption case: भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे बीएमसी अधिकारी! 35 लाख की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार, कोर्ट ने जमानत याचिका ठुकराई

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जो इंडिया/मुंबई: (BMC corruption case)

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महानगरपालिका (BMC) के अतिक्रमण विभाग में भ्रष्टाचार का बोलबाला लगातार बढ़ता जा रहा है। जनता के लिए सेवा करने वाले कई अधिकारी अब अपने पद का दुरुपयोग कर मोटी रकम वसूलने में लगे हैं। ऐसा ही एक ताज़ा मामला ठाणे नगर निगम से सामने आया है, जहाँ नगर निगम के नियंत्रण और निष्कासन विभाग के उपनगर आयुक्त शंकर पटोले सहित दो अन्य अधिकारियों को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने 35 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है।

रियल एस्टेट कारोबारी से मांगी थी 50 लाख की रिश्वत

जानकारी के अनुसार, ठाणे के एक रियल एस्टेट डेवलपर अभिजीत कदम ने एसीबी मुंबई में शिकायत दर्ज कराई थी कि नगर निगम के अधिकारी शंकर पटोले ने उनके परिसर से अतिक्रमण हटाने के लिए 50 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी।
कदम की शिकायत के बाद एसीबी ने जाँच शुरू की और अधिकारी की गतिविधियों पर नज़र रखी।

छापेमारी के दौरान पकड़ा गया रिश्वतखोर अधिकारी

1 अक्टूबर को ठाणे नगर निगम मुख्यालय में एसीबी ने छापेमारी की और आरोपियों को 35 लाख रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। एसीबी की इस कार्रवाई ने नगर निगम के अंदर मचे भ्रष्टाचार की पोल खोल दी है।
गिरफ्तारी के बाद तीनों अधिकारियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए जमानत याचिका की खारिज

गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों ने कोर्ट में जमानत के लिए याचिका दायर की थी, लेकिन सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को उनकी याचिका खारिज कर दी।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि रिश्वतखोरी जैसे गंभीर अपराधों में आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती। अदालत के इस फैसले के बाद मनपा विभाग में हड़कंप मच गया है।

भ्रष्टाचार के बढ़ते मामलों से मनपा की छवि धूमिल

बीते कुछ वर्षों में बीएमसी और ठाणे नगर निगम के कई अधिकारी भ्रष्टाचार के मामलों में पकड़े जा चुके हैं। आम नागरिकों का कहना है कि अधिकारी अपनी कुर्सी का फायदा उठाकर लोगों की मजबूरी से खेल रहे हैं।
मनपा की छवि अब जनता के बीच संदिग्ध बनती जा रही है। जनता का भरोसा कायम रखने के लिए अब कठोर कार्रवाई की मांग उठ रही है।

जनता और सामाजिक संगठनों की मांग — ‘भ्रष्ट अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई हो’

स्थानीय नागरिक संगठनों ने राज्य सरकार से मांग की है कि ऐसे भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ न सिर्फ सस्पेंशन बल्कि स्थायी बर्खास्तगी और संपत्ति जब्ती जैसी कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि दूसरों के लिए मिसाल बने।

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