Asha Bhosle
दिवंगत गायिका आशा भोसले की कहानी सिर्फ एक गायिका की नहीं, बल्कि संघर्ष, दर्द और जीत की कहानी है। महज 16 साल की उम्र, जब ज्यादातर लड़कियां सपने देख रही होती हैं, उस उम्र में आशा ताई ने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने उनकी पूरी जिंदगी ही बदल दी। उन्होंने अपनी ही बड़ी बहन Lata Mangeshkar
1948 से 1957 तक उन्होंने सबसे ज्यादा गाने तो गाए, लेकिन ये गाने उन्हें ना तो कोई पहचान दिला पाए और ना ही कोई खास नाम दे पाए। इतनी मेहनत के बाद भी उन्हें खास पहचान नहीं मिल पायी। लेकिन कहते हैं ना कि किस्मत हर मेहनत का साथ कभी ना कभी जरूर देती है. आशा ताई के साथ भी वही हुआ।
फिर आए संगीतकार O. P. Nayyar…
फिल्म नया दौर (1957) और पहली बार आशा भोसले बनीं नायिका की आवाज
यह सिर्फ एक मौका नहीं था, यह उनकी जिंदगी का मोड़ था। यां यूं कहें उनकी जिंदगी का टर्निंग पॉइंट. उनकी मुलाकात हुई एक युवा, अलग सोच वाले संगीतकार R. D. बर्मन से. दोनों की जोड़ी ने मानों संगीत की दुनिया ही बदलकर रख दी। हालांकि, यहां भी आशा ताई की राह आसान नहीं थी। जब 1966 में ‘तीसरी मंजिल’ का गाना ‘आजा आजा’ उनके सामने आया, तो उन्होंने खुद कहा, ‘मैं ये नहीं गा पाऊँगी।’ तब बर्मन साहब ने उनसे कहा, ‘मैं धुन बदल देता हूँ…’ और फिर क्या था आशा जी ने भी हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को बदला।
10 दिनों तक दिन-रात लगातार रियाज किया और जब गाया, तो वही गाना दशक का सबसे बड़ा हिट गाना बन गया। इतना ही नहीं, जो रिश्ता संगीत से शुरू हुआ था, वह 1980 में शादी में बदल गया। जब 1994 में बर्मन चले गए तो यह उनकी जिंदगी में एक और गहरा खालीपन छोड़ गया। लेकिन अब आशा भोसले रुकने वालों में से नहीं थीं। फिल्म ‘उमराव जान’ की गजलों ने यह साबित कर दिया कि आशा सिर्फ एक पॉप सिंगर नहीं बल्कि हर रंग की आवाज है। उम्र भले ही बढ़ती गई लेकिन गानों के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ। 62 साल की उम्र में उन्होंने A. R. Rahman के साथ फिल्म ‘रंगीला’ के लिए अपनी आवाज दी और 79 की उम्र में एक सफल गायिका के रूप में नई शुरुआत की। जरा सोचिए, जिस लड़की को 16 साल की उम्र में घर से ठुकरा दिया गया था, जिसे ‘बचे हुए गाने’ मिलते थे, वही एक दिन संगीत की दुनिया की अमर आवाज बन गई। और देखते ही देखते उनकी डिमांड भी बढ़ती चली गये…!



