जो इंडिया / नई दिल्ली: (Fuel Crisis India)
ईरान, अमेरिका और इज़रायल के बीच बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंकाओं ने भारत में ईंधन संकट की चिंता को और गहरा दिया है। इसका सबसे बड़ा असर आंध्र प्रदेश में देखने को मिला, जहां एक साथ 421 पेट्रोल पंप बंद होने की खबर से आम लोगों में हड़कंप मच गया। कई शहरों और कस्बों में खुले पेट्रोल पंपों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जबकि कई जगहों पर अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई।
राज्य में अचानक बढ़ी मांग, जमाखोरी और आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते हालात तेजी से बिगड़ते नजर आए। लोगों ने जरूरत से ज्यादा पेट्रोल-डीजल भरवाना शुरू कर दिया, जिससे खुले पंपों पर दबाव और बढ़ गया। कई स्थानों पर दोपहिया वाहन चालक घंटों लाइन में खड़े दिखाई दिए, जबकि मालवाहक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई।
इस पूरे मामले में केंद्र सरकार की भूमिका पर विपक्ष और आम जनता दोनों ने सवाल उठाए हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि अंतरराष्ट्रीय संकट के संकेत मिलने के बावजूद केंद्र सरकार समय रहते राज्यों के साथ समन्वय स्थापित नहीं कर सकी। ऊर्जा सुरक्षा, वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था और आपातकालीन रणनीति के अभाव ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
आंध्र प्रदेश सरकार ने हालात को देखते हुए तत्काल उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक बुलाई। मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने सभी जिलाधिकारियों, तेल कंपनियों के अधिकारियों और प्रशासनिक अमले को निर्देश दिए कि ईंधन आपूर्ति की निगरानी की जाए, जमाखोरी पर सख्त कार्रवाई हो और प्रत्येक जिले के भंडार की रिपोर्ट तुरंत भेजी जाए।
राज्य सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वास्तविक कमी से ज्यादा समस्या अफवाहों और अचानक बढ़ी मांग के कारण पैदा हुई है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराकर अतिरिक्त ईंधन न खरीदें और सामान्य जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश को अंतरराष्ट्रीय संकट के समय पहले से मजबूत भंडारण व्यवस्था, वैकल्पिक आयात मार्ग और तेज वितरण तंत्र तैयार रखना चाहिए। यदि समय रहते रणनीति नहीं बनाई गई तो आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी इसी तरह की परेशानी खड़ी हो सकती है।



