काशी की पवित्र धरती पर स्थित मणिकर्णिका घाट को लेकर एक बार फिर सियासत गरमा गई है। कांग्रेस
इस गंभीर मामले की जमीनी हकीकत जानने और विरोध दर्ज कराने के लिए कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल शुक्रवार को वाराणसी जाएंगे। उनके साथ प्रदेश कांग्रेस के सीनियर प्रवक्ता अतुल लोंढे, कांग्रेस OBC विभाग के प्रदेश अध्यक्ष यशपाल भिंगे, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारी और धनगर समाज के प्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल मणिकर्णिका घाट का दौरा कर भाजपा की ‘बुलडोजर सरकार’ द्वारा की गई तोड़फोड़ का निरीक्षण करेगा।
कांग्रेस का कहना है कि मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म का सबसे पवित्र और ऐतिहासिक घाट है, जहां सदियों से परंपराएं निभाई जाती रही हैं। लेकिन विकास के नाम पर इस घाट को जिस तरह नुकसान पहुंचाया गया है, वह आस्था और इतिहास दोनों के साथ खिलवाड़ है। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी मोदी और योगी सरकार के कार्यकाल में काशी क्षेत्र में सैकड़ों मंदिर तोड़े जा चुके हैं, और अब मणिकर्णिका घाट, वहां मौजूद देवी-देवताओं की मूर्तियों और छोटे-छोटे मंदिरों को नुकसान पहुंचाकर अहिल्याबाई होल्कर के ऐतिहासिक कार्यों का अपमान किया गया है।
प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि यह सिर्फ एक घाट को नुकसान पहुंचाने का मामला नहीं है, बल्कि यह अहिल्याबाई होल्कर की विरासत, धनगर समाज और पूरे हिंदू समाज की आस्था का अपमान है। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार संस्कृति, परंपरा और इतिहास को मिटाने की कोशिश कर रही है, जिसे कांग्रेस किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेगी।
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को सड़क से सदन तक उठाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेगी। वाराणसी दौरे के बाद पार्टी आगे की रणनीति तय करेगी और इस कथित तोड़फोड़ के खिलाफ आंदोलन तेज करने के संकेत भी दिए हैं।



