जोइंडिया टीम/ मुंबई: मुंबई (Mumbai)
शहर का AQI पिछले आठ दिनों से 125 पर बना हुआ है, जिससे श्वसन संबंधी मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज की जा रही है। चिकित्सकों ने स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए मुंबईकरों को सावधानी बरतने की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से स्वस्थ व्यक्तियों पर भी असर पड़ सकता है।
बढ़ता प्रदूषण, स्वास्थ्य पर असर
मुंबई में बढ़ते प्रदूषण (Mumbai Air Pollution) का मुख्य कारण बुनियादी ढांचागत परियोजनाएं, भारी यातायात और धुआं फैलाने वाले स्रोत हैं। मुंबई मनपा अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे कचरा जलाने से बचें, निजी वाहनों का उपयोग कम करें और प्रदूषण घटाने के सामूहिक उपाय अपनाएं।
हालांकि इसके बावजूद शहर की हवा में सुधार नहीं दिख रहा है। कम तापमान और धीमी हवा के कारण प्रदूषक कण जमीन के पास फंस जाते हैं, जिससे खासकर सुबह और शाम के समय धुंध छा जाती है।
संवेदनशील समूहों के लिए सावधानी
वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अनिल सिंघल ने बताया कि सर्दियों में प्रदूषक तत्व जमीन के पास तैरते रहते हैं, जिससे सांस फूलना, लगातार खांसी, घरघराहट और अस्थमा के लक्षण बढ़ जाते हैं। बुजुर्ग, बच्चे और फेफड़े या हृदय रोग के मरीज विशेष रूप से प्रभावित होते हैं।
डॉ. सिंघल ने सलाह दी कि ऐसे लोग सुबह-सुबह बाहर जाने से बचें, मास्क पहनें और सांस लेने में दिक्कत होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
एहतियाती उपाय
- AQI 100 से ऊपर जाने पर इसे नजरअंदाज न करें।
- प्रदूषण के चरम समय में बाहरी गतिविधियों को सीमित करें।
- पर्याप्त पानी पिएं और शरीर को हाइड्रेट रखें।
- दैनिक AQI अपडेट पर नजर रखें।
- लक्षण बने रहने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
मुंबईकरों के लिए यह जरूरी है कि वे सावधानी अपनाकर स्वास्थ्य जोखिमों को कम करें और प्रदूषण से बचाव के उपाय अपनाएं।



