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Reading: महाराष्ट्र के लिए लाभप्रद परियोजनाएं गुजरात ले जा रहे हो तो प्रदूषण बढ़नेवाले उद्योग डहाणू में क्यों?, माकपा विधायक ने उठाया सवाल
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महाराष्ट्र के लिए लाभप्रद परियोजनाएं गुजरात ले जा रहे हो तो प्रदूषण बढ़नेवाले उद्योग डहाणू में क्यों?, माकपा विधायक ने उठाया सवाल

Deepak dubey
Last updated: November 27, 2023 12:44 pm
Deepak dubey
Published: November 27, 2023
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Vinod Bhiva Nikole
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मुंबई। महाराष्ट्र के विकास में लाभप्रद और बेरोजगार को रोजगार मुहैया करानेवाली परियोजनाओं को चुन-चुन कर दूसरे राज्यों में ले जाया जा रहा है। इससे राज्य के विकास पर बुरी तरह असर पहुंच रहा है। इन सबके बीच मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के स्थानीय विधायक विनोद निकाले ने सवाल उठाया है कि जब सारे उद्योग गुजरात ले जा रहे हो तो प्रदूषण बढ़ानेवाले उद्योग डहाणू में क्यों छोड़ रहे हो, उसे भी गुजरात में ले जाओ।

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वाढवण बंदरगाह को लेकर हाल ही में राज्य के सार्वजनिक निर्माण मंत्री और पालघर जिले के पलक मंत्री रवींद्र चव्हाण ने हाल ही एक बैठक बुलाई थी। इस बैठक में विधायक विनोद निकाले ने वाढवण स्थित बंदरगाह का विरोध करने वाले विभिन्न मुद्दे उठाए थे। विनोद निकाले ने स्पष्ट किया कि वाढवण बंदरगाह का स्थानीय विरोध कर रहे हैं। ऐसे में इस योजना का मेरा भी विरोध है। राज्य सरकार के समक्ष इस बंदरगाह का विरोध करनेवाले आठ मुद्दे रखे। उन्होंने सवाल किया कि क्या प्रस्तावित बंदरगाह क्षेत्र पर्यावरणीय रूप से संरक्षित है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में आर्थिक विकास की दर अच्छी है और लोग स्वरोजगार कर रहे हैं। यहां डाइ मेकिंग, कृषि, वाडी, बागवानी, मछली पकड़ने का काम व्यापक रूप से किया जाता है। इस कारण यहां से विदेशी मुद्रा भी अर्जित होती है। इन सबसे आधारित पूरक उद्योगों के साथ-साथ उस पर आधारित आदिवासी श्रमिक वर्ग की भी श्रृंखला है, जिनकी संख्या लाखों में है। ऐसे में इस बंदरगाह के कारण ये न केवल डगमगा जाएगा, बल्कि नष्ट भी हो जाएगा। उन्होंने कहा है कि
वाढवण में जनसंख्या की घनता भी अधिक है। इसके साथ ही उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि प्रदूषण के कारण यह बंदरगाह सामाजिक दृष्टि से भी परेशानी का सबब बनेगा।

सुजलाम सुफलाम है वाढवण क्षेत्र

बंदरगाह के लिए आवश्यक प्राकृतिक गहराई 20 मीटर बताई जाती है। वह गुजरात राज्य के जयगढ़ के साथ-साथ नारगोल में भी उपलब्ध है, जो प्रस्तावित वाढवण बंदरगाह से महज 20 से 25 किमी दूर है। विनोद निकाले ने सरकार का ध्यान इस ओर आकर्षित किया कि विस्तार का मुख्य क्षेत्र सुजलाम सुफलाम है। उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि औद्योगिक परियोजना को गुजरात में भेजा जा रहा है तो वाढवण की बजाय नारगोल में बंदरगाह परियोजना तैयार करने में क्या दिक्कत हैं। हालांकि राज्य सरकार ने जवाब देने से इनकार कर दिया।

मछली पकड़ने का गोल्डन बेल्ट

झाई से मुंबई बंदरगाह तक हजारों मछुआरों की नावें चलती हैं, जो मछलियां पकड़ने का काम करते हैं। यह क्षेत्र मछली के लिए गोल्डन बेल्ट है। ऐसे में यदि बंदरगाह यह बनाया जाता है तो पांच हजार एकड़ क्षेत्र के पाटे जाने से मछली बीज केंद्र नष्ट हो जाएगा। इतना ही नहीं खाड़ी और तट पर मछली पकड़ने वाले हजारों लोगों का व्यवस्था नष्ट हो जाएंगे।

फल के बागान भी हो जाएंगे तबाह

थर्मल पावर से निकलने वाली उड़ती राख के कारण चना और नारियल जैसे बागानों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है और वे तबाह हो जाएंगे। इसके अलावा उन्होंने चिंता व्यक्त की है कि इस बंदरगाह के कारण यहां हर दिन 35,000 ट्रकों और खड़े नावों से पैदा होनेवाले धुएं के प्रदूषण के कारण बगीचों, कृषि और मानव स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।

तबाह करके कैसा देश का विकास

बंदरगाह के लिए पांच हजार एकड़ भूमि पाटी जाएगी। अगर इसके लिए दमन सागर से मिट्टी भी लाई जाए तो भी इस क्षेत्र के पहाड़ और जंगल बड़े पैमाने पर नष्ट हो जाएंगे। एक तरफ परमाणु ऊर्जा संयंत्र और उससे होनेवाला प्रदूषण, दूसरी तरफ एमआईडीसी से निकलनेवाला प्रदूषण, थर्मल पावर से होनेवाले प्रदूषण और अब यह विनाशकारी परियोजना यानी स्थानीय लोग खुद को तबाह करके देश का विकास कैसे कर सकते हैं? लेकिन सरकार इस सवाल का जवाब नहीं देती। इसीलिए ही स्थानीय लोगों के साथ हमारा भी इस बंदरगाह का विरोध हैं।

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