झोपड़पट्टीवासियों के आवास अधिकारों की रक्षा के लिए गठित स्लम पुनर्विकास प्राधिकरण (SRA) पर अब उन्हीं अधिकारों को कुचलने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। वरली (Worli)
कानूनी मंजूरी के बावजूद परियोजना पर ब्रेक
‘सागर दर्शन को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी’ और ‘चैतन्य साईं जनता कॉलोनी को-ऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी’ की यह SRA परियोजना करीब 30 वर्षों तक ठप पड़ी थी। हाल ही में एक सक्षम और कानूनी रूप से नियुक्त डेवलपर ने सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए परियोजना को पुनर्जीवित किया।
सभी पहलुओं की जांच के बाद SRA ने अक्टूबर 2024 में निर्माण की औपचारिक मंजूरी दी थी। इसके बाद काम भी शुरू हुआ और वर्षों से इंतजार कर रहे निवासियों में उम्मीद जगी।
लेकिन जब निर्माण कार्य सुचारू रूप से चल रहा था, तभी SRA के CEO ने धारा 13(2) के तहत बिना किसी स्पष्ट, ठोस या पारदर्शी कारण के डेवलपर को हटाने का नोटिस जारी कर दिया। इस फैसले से परियोजना फिर अनिश्चितता के भंवर में फंस गई और हजारों परिवारों का भविष्य खतरे में पड़ गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में नागरिकों का आक्रोश
इस फैसले के विरोध में 21 दिसंबर को परियोजना से प्रभावित नागरिकों ने वरली के कोली समाज भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। “महेंद्र कल्याणकर साहब, गेट वेल सून” जैसे तीखे नारों के साथ नागरिकों ने SRA प्रशासन के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। निवासियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों की अनदेखी की गई, तो वे आगामी चुनावों में मतदान बहिष्कार जैसा कठोर कदम उठाने को मजबूर होंगे।
न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सवाल
नागरिकों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या SRA प्रशासन न्यायिक प्रक्रिया की अनदेखी कर रहा है। पास की ही एक अन्य SRA परियोजना, जिसमें 2,054 परिवार शामिल हैं और जो फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, उसमें भी धारा 13(2) के तहत कार्रवाई की तैयारी की खबरें सामने आई हैं। इससे माननीय उच्च न्यायालय के अधिकारों और पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जब निवासी डेवलपर के साथ, तो रुकावट क्यों?
निवासियों का कहना है कि संबंधित डेवलपर पूरी तरह सक्षम है और उसे परियोजना-प्रभावित परिवारों का पूर्ण समर्थन प्राप्त है। तकनीकी, कानूनी या वित्तीय स्तर पर किसी भी तरह की खामी का कोई रिकॉर्ड नहीं होने के बावजूद परियोजना को रोका जा रहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर SRA उन परियोजनाओं को क्यों रोक रही है, जिनका उद्देश्य पात्र झोपड़पट्टीवासियों को उनका वैध घर दिलाना है।
30 साल का इंतजार, जिंदगी ठहर गई
दशकों से सम्मानजनक घर की आस लगाए बैठे बुजुर्ग निवासियों के लिए यह अनिश्चितता बेहद पीड़ादायक है। बार-बार के प्रशासनिक हस्तक्षेप से परियोजना की लागत बढ़ रही है, समयसीमा खिसक रही है और आम परिवारों का भविष्य अंधकार में जा रहा है।
आंदोलन की चेतावनी
वरलीवासियों ने दो टूक कहा— “हमारी मांग बहुत साधारण है—न्याय और हमारा घर।”
निवासियों ने SRA की कथित जनविरोधी भूमिका के खिलाफ बड़े स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी है और मीडिया से अपील की है कि पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कर सच्चाई सामने लाई जाए, ताकि हजारों जरूरतमंद परिवारों के भविष्य के साथ न्याय हो सके।




