जोइंडिया टीम/मुंबई: मनपा चुनाव से ठीक पहले भारतीय जनता पार्टी में बड़े पैमाने पर अपनाई गई “रेड कार्पेट राजनीति” (BJP Internal Conflict) अब खुद पार्टी के लिए मुसीबत बनती दिख रही है। चुनाव के ऐन मौके पर बड़ी संख्या में आयाराम–गयाराम नेताओं को पार्टी में शामिल कर न सिर्फ उन्हें तरजीह दी गई, बल्कि वर्षों से संगठन की सेवा कर रहे निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर टिकट भी थमा दिए गए। इस फैसले से भाजपा के जमीनी कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी फैल गई है।
पार्टी के भीतर हालात ऐसे बन गए हैं कि आयातित नेताओं की “सेटिंग” इतनी हावी हो गई है कि आम कार्यकर्ताओं की आंखों में दर्द और मन में गुस्सा साफ झलकने लगा है। चांदा से बांदा तक निष्ठावानों का आक्रोश खुलकर सामने आ रहा है। आयारामों की सेटिंग और निष्ठावानों की कटिंग से खफा कार्यकर्ता अब नेतृत्व के खिलाफ खुले तौर पर भड़ास निकाल रहे हैं। कई इलाकों में बगावत की सुगबुगाहट तेज हो गई है, तो कहीं कार्यकर्ता चुपचाप चुनावी प्रक्रिया से खुद को अलग करने की तैयारी में हैं। कई पुराने कार्यकर्ताओं के सामने एक बार फिर “दरी उठाने” की नौबत आ गई है।
पार्टी के भीतर यह चर्चा आम होती जा रही है कि संगठन की रीढ़ माने जाने वाले समर्पित कार्यकर्ताओं की बलि देकर सत्ता-संतुलन और व्यक्तिगत समीकरणों को प्राथमिकता दी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही स्थिति बनी रही, तो इसका सीधा और नकारात्मक असर भाजपा के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
इस बीच शिवसेना (उद्धव गुट) की प्रवक्ता सुषमा अंधारे (Susham Andhare) ने भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये (Keshav Upadhye) पर तीखा और व्यंग्यात्मक हमला बोला है। अंधारे ने एक ट्वीट में लिखा, “मुझे आज सबसे ज्यादा बुरा आपके लिए लगता है…”। राजनीतिक गलियारों में इस एक पंक्ति को भाजपा के भीतर बढ़ती असहजता और अंदरूनी तनाव पर करारा तंज माना जा रहा है।
केशवराव
मला आज सगळ्यात जास्त वाईट वाटतंय ते तुमच्याबद्दल… ! pic.twitter.com/zxd9vJS6Bs
— SushmaTai Andhare (@andharesushama) December 30, 2025
दरअसल, हाल ही में भाजपा के मीडिया प्रमुख बनाए गए नवनाथ बन को भी मुंबई से चुनावी टिकट दे दिया गया है। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के परिवार के तीन सदस्यों को टिकट, विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर के भाई प्रकाश दरेकर को दहिसर के वार्ड क्रमांक तीन से उम्मीदवार बनाए जाने, और मुंबई अध्यक्ष अमित साटम के कथित रिश्तेदारों को टिकट दिए जाने जैसे फैसलों ने पार्टी के भीतर “आयारामों की सेटिंग बनाम निष्ठावानों की कटिंग” की बहस को और तेज कर दिया है।
वहीं, प्रवक्ताओं की बढ़ती संख्या को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। भाजपा प्रवक्ता केशव उपाध्ये ने फेसबुक पोस्ट के जरिए दावा किया कि पार्टी ने महानगरपालिका चुनावों में “युवाओं पर भरोसा” जताते हुए 9 युवा प्रवक्ताओं को टिकट दिया है। इनमें मुंबई से नवनाथ बन, गणेश खंडकप, रानी द्विवेदी, नील सोमय्या, योगेश वर्मा और मकरंद नार्वेकर, ठाणे से मृणाल पेंडसे, पुणे से कुणाल टिळक और नागपुर से शिवानी दाणी शामिल हैं।
उपाध्ये ने इन सभी को ऊर्जावान, अध्ययनशील और जमीनी स्तर पर काम करने में सक्षम बताया है, लेकिन पार्टी के भीतर ही यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि जब वर्षों से मेहनत करने वाले समर्पित कार्यकर्ता टिकट से वंचित हैं, तब केवल प्रवक्ताओं और नए प्रवेशकों को मौका देकर भाजपा आखिर किस तरह का संदेश देना चाहती है?



