जोइंडिया टीम/मुंबई: अजित पवार (Ajit Pawar) गुट ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के टिकट पर एक बार फिर विवादास्पद कदम उठाया है। आयुष कोमकर हत्याकांड (Ayush Komkar Murder Case)
इससे पहले अजित पवार गुट ने पुणे से कुख्यात अपराधी गजा मारणे की पत्नी जयश्री मारणे को भी उम्मीदवार घोषित किया था। अब आपराधिक पृष्ठभूमि वाले आंदेकर परिवार की दो और महिलाओं को टिकट दिए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। पुणे को “अपराधमुक्त” बनाने के दावे पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
अदालत की सशर्त अनुमति
विशेष अदालत ने बंडू आंदेकर और उनके परिवार की लक्ष्मी उदयकांत आंदेकर तथा सोनाली वनराज आंदेकर को आगामी महानगरपालिका चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की सशर्त अनुमति दी थी। इसके बाद 27 दिसंबर को दोनों महिलाओं ने अपना नामांकन दाखिल किया। अदालत ने बंडू आंदेकर को चुनाव प्रचार के दौरान किसी भी रैली, भाषण या नारेबाजी से रोक दिया है। वहीं, सोनाली और लक्ष्मी आंदेकर 5 करोड़ 40 लाख रुपये की रंगदारी मामले में जेल में बंद हैं और चुनाव प्रचार के दौरान उन्हें सख्त नियमों का पालन करना होगा।
मामले की पृष्ठभूमि
पूर्व नगरसेवक वनराज आंदेकर के रिश्तेदार गणेश कोमकर के बेटे आयुष कोमकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्या ने आंदेकर गिरोह के भीतर विवाद और भड़काया। इस केस में 70 वर्षीय नाना बंडू उर्फ सूर्यकांत राणोजी आंदेकर सहित 13 लोगों के खिलाफ हत्या और महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
हत्याकांड के बाद बंडू आंदेकर का बेटा कृष्णा उर्फ कृष्णराज आंदेकर फरार हो गया था। बंडू आंदेकर ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि कृष्णा नहीं मिला तो एनकाउंटर होगा। अगले ही दिन कृष्णा आंदेकर स्वयं समर्थ पुलिस थाने में पेश हो गया।
राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि जेल में बंद उम्मीदवारों को टिकट देने का कदम चुनावी राजनीति में नई बहस खड़ी कर रहा है। पुणे में अपराधमुक्ति के दावे की वैधता, न्यायिक हिरासत में रहने वाले उम्मीदवारों के चुनाव प्रचार की सीमाएं और अपराधियों को लेकर राजनीतिक खेल अब नगर निगम चुनाव में सबसे बड़े विवादों में से एक बन गया है।



