जो इंडिया / मुंबई। (Two-Day Ultimatum in Prabhadevi)
मुंबई के प्रभादेवी इलाके में चल रही महत्वाकांक्षी पुल परियोजना अब विवादों के केंद्र में आ गई है। मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (Mumbai Metropolitan Region Development Authority) ने हाजी नूरानी और लक्ष्मी निवास इमारत के रहिवासियों को दो दिन के भीतर घर खाली करने का सख्त नोटिस जारी किया है। इस अल्टीमेटम के बाद इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बन गई है और प्रभावित परिवारों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।
नोटिस में स्पष्ट रूप से चेतावनी दी गई है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर मकान खाली नहीं करने पर घर में मौजूद सामान के नुकसान के लिए प्राधिकरण जिम्मेदार नहीं होगा। इस सख्त रुख ने वर्षों से यहां रह रहे परिवारों को गहरे संकट में डाल दिया है।
दरअसल, प्रभादेवी में डबल-डेकर पुल निर्माण परियोजना के तहत कुल 83 परिवार प्रभावित हो रहे हैं। प्राधिकरण का दावा है कि सभी परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था की गई है। हालांकि, स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्हें दिए गए घर न तो तय मानकों के अनुरूप हैं और न ही वहां बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह उपलब्ध हैं।
रहिवासियों के अनुसार, उन्हें 405 वर्ग फुट के फ्लैट देने का वादा किया गया था, लेकिन कई परिवारों को इससे छोटे घर आवंटित किए गए हैं। वहीं, जिन परिवारों को अपेक्षाकृत बड़े फ्लैट दिए गए हैं, उनसे अतिरिक्त क्षेत्र के नाम पर लाखों रुपये की मांग की जा रही है। इस वजह से कई परिवार नए घरों को स्वीकार करने में असमंजस की स्थिति में हैं।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पुल का निर्माण कार्य अभी शिवड़ी और वर्ली क्षेत्रों में पूरी तरह से पूरा नहीं हुआ है, इसके बावजूद उन्हें जल्दबाजी में घर खाली करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि यदि पुनर्वास किया भी जा रहा है, तो कम से कम उन्हें नए घरों की मरम्मत और व्यवस्थित होने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए।
कुछ प्रभावित परिवारों को प्रियदर्शिनी इमारत में स्थानांतरित किया गया है, लेकिन वहां की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही। रहिवासियों का आरोप है कि शौचालयों की हालत खराब है, जिनकी मरम्मत पर करीब 50 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ रहा है। इसके अलावा, 475 वर्ग फुट के फ्लैट के लिए करीब 18.5 लाख रुपये तक की मांग ने आर्थिक बोझ को और बढ़ा दिया है।
इतना ही नहीं, कई परिवारों का कहना है कि नए आवासों में अभी तक पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं भी पूरी तरह से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में वहां रहना मुश्किल हो रहा है। बावजूद इसके, प्राधिकरण ने 24 अप्रैल तक घर खाली करने का अंतिम निर्देश जारी कर दिया है और चेतावनी दी है कि समयसीमा के बाद निष्कासन की कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला अब केवल एक विकास परियोजना तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या शहरी विकास के नाम पर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को पर्याप्त पुनर्वास के बिना विस्थापन के लिए मजबूर किया जा रहा है।
फिलहाल, स्थानीय निवासियों ने प्रशासन से कम से कम एक महीने की मोहलत देने और पुनर्वास सुविधाओं को बेहतर बनाने की मांग की है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला, तो यह मुद्दा बड़े स्तर पर जनआंदोलन का रूप ले सकता है।



