Joindia
देश-दुनिया

…. तो समलैंगिकों का स्वर्ग बन जाएगा थाईलैंड!

117338023 750f2ea0 f91f 4495 bd9d f7523123e212

बैंकॉक के कैफेटेरिया में एक समूह बैठा हुआ है। सभी के चेहरे में काफी हद तक खुशी दिखाई दे रही है। उनके बीच चर्चा काफी समय से चल रही है। उन सभी के एक गाल पर रंग बिरंगी रेनबो का निशाना बना हुआ है। एक 40 वर्षीय व्यक्ति उसके बगल में बैठे 35 साल के व्यक्ति के हाथ को अपने हाथ में लेकर चूमता है और कहता है, ‘अगर सब कुछ ठीक ढंग से हो जाए तो हम दोनों की पिछले 25 साल से चल रही प्रेम कहानी को एक नाम मिल जाएगा। हम दोनों वाइफ हस्बैंड की तरह रह पाएंगे हमारी शादी हो जाएगी।’

Advertisement

एक दूसरे टेबल पर बैठी 22 वर्षीय युवती ने सामने बैठी हुई 32 वर्षीय महिला का हाथ थाम रखा है। दोनों ने चटकदार कपड़े पहन रखे हैं वह युवती उसे महिला को अपनी ओर खींचती है और उसे हग करते हुए सभी से कहती है ‘आप लोग हमारे लिए भी प्रार्थना करें हमारी जिंदगी में भी खूबसूरत रंग भर जाए।’
थाईलैंड के बैंकॉक शहर के इस कैफेटेरिया में एलजीबीटी समूह के सदस्य हैं। यह सभी लोग थाईलैंड के रेनबो स्काई एसोसिएशन से जुड़े हुए हैं यह सब खुश है। इनकी खुशी की वजह भी है उन्हें आशा है कि जल्दी ही थाईलैंड सरकार समलैंगिक विवाह को मान्यता दे देगी

पिछले हफ्ते थाई सरकार की कैबिनेट ने एक विधेयक का समर्थन किया जो देश के नागरिक और वाणिज्यिक संहिता में संशोधन करेगा ताकि किन्हीं दो “व्यक्तियों” के बीच विवाह को परिभाषित किया जा सके।यदि संसद द्वारा अनुमोदित किया जाता है, तो यह थाईलैंड समलैंगिक विवाह को वैध बनाने वाला दक्षिण पूर्व एशिया का पहला देश बन जाएगा। हालांकि ताइवान पूरे एशिया में ऐसा पहला देश है। फिलहाल थाईलैंड का कानून इस तरह के विभाग को मानता नहीं देता। लेकिन इसने कानून के मसले पर थाईलैंड की वर्तमान सरकार को गलियारे के दोनों ओर के प्रमुख दलों का भी समर्थन है।

हालांकि पिछले दो प्रशासनों ने समलैंगिक संघ या विवाह विधेयक को पास करने की पूरी कोशिश की थी लेकिन राष्ट्रीय चुनावों के लिए संसद को भंग किया जाना इस मामले में रोड़ा साबित हुआ। फिलहाल एलजीबीटीक्यू अधिकारों की वकालत करने वालों का मानना है कि यह कानून पारित कराने के लिए थाईलैंड के पास अब तक का सबसे अच्छा मौका है।

समलैंगिक विवाहों के मामले में धर्म बड़ा मसला बनकर उभरता आया है थाईलैंड में भी हालात जुदा नहीं है। एलजीबीटीक्यू अधिकारों की वकालत करने वाले थाईलैंड के रेनबो स्काई एसोसिएशन के सलाहकार और नीति विश्लेषक रैपीपुन जोमारोएंग को भी लगता है कि कुछ धार्मिक समूह, मुख्य रूप से बौद्ध देश के ईसाई और मुस्लिम अल्पसंख्यक इस कानून का विरोध कर सकते हैं। उनका कहना है कि यह कानून उन लोगों को मजबूर नहीं करेगा जो इसे नहीं मानते ये आजादी उन लोगों के लिए है जो इसके पक्ष में हैं।
2019 में थाईलैंड की संसद के लिए चुने गए पहले चार एलजीबीटीक्यू सांसदों में से एक तुन्यावत कामोलवोंगवाट कहते हैं, इसका शाब्दिक अर्थ जीवन और मृत्यु के बीच अंतर हो सकता है। सरकार के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट एडमिनिस्ट्रेशन के 2022 के सर्वेक्षण में पाया गया कि सर्वेक्षण में शामिल लगभग 80 प्रतिशत लोगों ने समलैंगिक विवाह को वैध बनाने का समर्थन किया।
दक्षिण पूर्व एशिया में, ब्रुनेई और मलेशिया, दोनों मुस्लिम- बहुल देश, और म्यांमार सभी समलैंगिक या लेस्बियन यौन संबंध को गैरकानूनी मानते हैं। उन सभी को उम्मीद है कि थाईलैंड जल्द ही उन लोगों के लिए आशा की “बीकन” बन जाएगा जो कहीं और बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं, या कम से कम उन लोगों के लिए एक आश्रय स्थल बन जाएगा जो अपने यौन अभिविन्यास के लिए उत्पीड़न से राहत चाहते हैं। थाईलैंड में यदि समलैंगिक विवाह को मान्यता मिल जाती है कानूनी तौर पर, तो यह देश एशिया के कई देशों के लोगों के लिए स्वर्ग बन जाएगा जो समलैंगिक विवाह के पक्षधर हैं और समलैंगिक विवाह करना चाहते हैं।

Related posts

Shiv Sena will go to Supreme Court against the decision of 227 wards : 227 वार्ड के फैसले के विरोध में शिवसेना जाएगी सुप्रीम कोर्ट, जल्द ही निर्णय की करेंगे घोषणा

Deepak dubey

Femto Z8 Neo: नई तकनीक से आंख की हर छोटी बड़ी बिमारी का होगा सफल इलाज

Deepak dubey

Ramayana book series unveiled: मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथो रामायण पुस्तक शृंखला का अनावरण

Deepak dubey

Leave a Comment