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Reading: ‘किराने की दुकान से UPSC तक’, Kartik Singhal ने चौथे प्रयास में हासिल की 340वीं रैंक
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देश-दुनिया

‘किराने की दुकान से UPSC तक’, Kartik Singhal ने चौथे प्रयास में हासिल की 340वीं रैंक

JoIndia Online Correspondent
Last updated: March 10, 2026 12:58 pm
JoIndia Online Correspondent
Published: March 10, 2026
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Kartik Singhal
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देश की सबसे कठिन और प्रतिष्ठित परीक्षाओं में मानी जाने वाली UPSC Civil Services Examination का रिजल्ट सामने आते ही हर साल कई ऐसी कहानियां सामने आती हैं, जो लाखों युवाओं को नई उम्मीद और प्रेरणा देती हैं। इस बार भी Union Public Service Commission

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द्वारा घोषित सिविल सर्विसेज परीक्षा 2025 के परिणामों में एक नाम खास तौर पर चर्चा में है—राजस्थान के छोटे से कस्बे नारायणपुर के रहने वाले Kartik Singhal।

कार्तिक सिंघल ने चौथे प्रयास में 340वीं रैंक हासिल कर यह साबित कर दिया कि सीमित संसाधन और कठिन परिस्थितियां भी मजबूत इरादों के सामने छोटी पड़ जाती हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि संघर्ष, धैर्य और लगातार मेहनत की मिसाल भी है।

छोटे कस्बे से बड़े सपने तक का सफर

कार्तिक किसी बड़े शहर या संपन्न परिवार से नहीं आते। उनके पिता रमेश चंद सिंघल राजस्थान के नारायणपुर कस्बे में एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं। परिवार की आय सीमित थी और आर्थिक परिस्थितियां भी बहुत मजबूत नहीं थीं। लेकिन माता-पिता ने कभी अपने बेटे के सपनों को छोटा नहीं होने दिया।

Kartik singhal ने Maharaja College Jaipur से बीएससी की डिग्री हासिल की। joindia
Kartik singhal ने Maharaja College Jaipur से बीएससी की डिग्री हासिल की। joindia.co.in

कार्तिक ने अपनी शुरुआती पढ़ाई नारायणपुर के एक हिंदी माध्यम स्कूल से की। छोटे कस्बे के माहौल में पढ़ाई करते हुए उन्होंने बारहवीं तक की शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर का रुख किया और Maharaja College Jaipur से बीएससी की डिग्री हासिल की।

हिंदी मीडियम से पढ़ाई, लेकिन परीक्षा अंग्रेजी में

कार्तिक की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने स्कूल की पढ़ाई पूरी तरह हिंदी माध्यम से की थी। इसके बावजूद उन्होंने UPSC की परीक्षा अंग्रेजी माध्यम में दी। यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि भाषा बदलना किसी भी छात्र के लिए बड़ी चुनौती होती है।

कार्तिक सिंघल upsce एग्जाम क्रैक
कार्तिक सिंघल upsce एग्जाम क्रैक joindia

लेकिन कार्तिक ने इसे कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने धीरे-धीरे अंग्रेजी पर पकड़ बनाई और अपनी तैयारी को उसी हिसाब से ढाल लिया। यही आत्मविश्वास और मेहनत उनके सफर की सबसे बड़ी ताकत बन गई।

10 घंटे की पढ़ाई और सख्त रूटीन

UPSC की तैयारी के दौरान कार्तिक का रूटीन बेहद अनुशासित था। वे रोज सुबह 7 बजे पढ़ाई शुरू करते और रात करीब 8:30 बजे तक लगातार पढ़ते थे। यानी लगभग 10 घंटे की नियमित पढ़ाई उनकी दिनचर्या का हिस्सा थी।

तैयारी को और बेहतर बनाने के लिए उन्होंने दिल्ली में रहकर भी पढ़ाई की। वहां उन्होंने सिलेबस को व्यवस्थित तरीके से समझा, नोट्स बनाए और लगातार अभ्यास किया।

कठिन माने जाने वाले विषय को बनाया ताकत

UPSC के अभ्यर्थियों में अक्सर गणित से दूरी बनाने का चलन देखा जाता है, क्योंकि इसे कठिन विषय माना जाता है। लेकिन कार्तिक ने इससे उलट फैसला लिया और मैथेमैटिक्स को अपना ऑप्शनल विषय चुना।

उन्होंने मेंस परीक्षा की तैयारी करते समय जनरल स्टडीज और ऑप्शनल विषय दोनों को बराबर महत्व दिया। यही संतुलित रणनीति उनके लिए फायदेमंद साबित हुई।

असफलता से मिली सीख

कार्तिक की सफलता रातों-रात नहीं मिली। उन्होंने साल 2022 में पहली बार UPSC की परीक्षा दी थी, लेकिन उस समय वे प्रीलिम्स भी पास नहीं कर सके। यह किसी भी उम्मीदवार के लिए बड़ा झटका हो सकता था, लेकिन कार्तिक ने इसे हार नहीं बनने दिया।

उन्होंने अपनी गलतियों का विश्लेषण किया, तैयारी की रणनीति बदली और पहले से ज्यादा मेहनत के साथ दोबारा परीक्षा दी। लगातार प्रयासों के बाद आखिरकार चौथे प्रयास में उन्हें वह सफलता मिल गई, जिसका सपना उन्होंने कई सालों से देखा था।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनी कहानी

आज कार्तिक सिंघल की सफलता की कहानी देशभर के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। एक साधारण परिवार का बेटा, जिसके पिता एक छोटी सी किराने की दुकान चलाते हैं, उसने देश की सबसे कठिन परीक्षा में सफलता हासिल कर यह दिखा दिया कि सपनों को पूरा करने के लिए जरूरी सिर्फ एक चीज होती है, मजबूत इरादा।

कार्तिक की कहानी यह भी बताती है कि अगर लक्ष्य साफ हो, मेहनत ईमानदार हो और हार के बाद भी कोशिश जारी रहे, तो किसी भी मंजिल तक पहुंचना असंभव नहीं होता। उनकी यह उपलब्धि न सिर्फ उनके परिवार के लिए गर्व का पल है, बल्कि उन सभी युवाओं के लिए उम्मीद की किरण भी है जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं।

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