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बिजनेसमुंबई

RBI warning on states finances: रेवड़ी कल्चर से डगमगाई राज्यों की अर्थव्यवस्था! आरबीआई की सख्त चेतावनी — मुफ्त योजनाओं की होड़ से बढ़ा घाटा, विकास पर लगा ब्रेक

Deepak dubey
Last updated: November 8, 2025 11:19 am
Deepak dubey
Published: November 8, 2025
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पीआरएस की रिपोर्ट में खुलासा: कमाई घट रही, कर्ज़ और खर्च बढ़ रहे हैं चिंताजनक रफ्तार से

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जो  इंडिया / नई दिल्ली: (RBI warning on states finances)

देश की आर्थिक सेहत को लेकर एक गंभीर चेतावनी सामने आई है। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने राज्यों को आगाह किया है कि अगर उन्होंने “रेवड़ी कल्चर” यानी मुफ्त योजनाओं की होड़ पर रोक नहीं लगाई, तो आने वाले वर्षों में कई राज्यों की अर्थव्यवस्था धराशायी हो सकती है।

‘स्टेट ऑफ स्टेट फाइनेंसेस 2025’ नामक रिपोर्ट जारी करने वाली संस्था पीआरएस लेजिस्लेटिव रिसर्च ने खुलासा किया है कि देश के आधे से अधिक राज्य अब अपनी आमदनी से अधिक खर्च कर रहे हैं। इस स्थिति ने राज्यों के राजस्व घाटे को चिंताजनक स्तर पर पहुंचा दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में राज्यों का औसत राजस्व घाटा उनके जीएसडीपी का 0.4 प्रतिशत तक पहुंच गया है। सबसे अधिक खर्च वेतन, पेंशन, ब्याज भुगतान और सब्सिडी योजनाओं में हो रहा है। आंकड़े बताते हैं कि राज्यों की कुल आमदनी का 62 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ इन मदों में चला जाता है, जिससे विकास कार्यों पर लगातार कैंची चल रही है।

कर्ज़ में डूबते राज्य

मार्च 2025 तक राज्यों का कुल कर्ज़ जीएसडीपी के मुकाबले 27.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जबकि वित्तीय अनुशासन की तय सीमा 20 प्रतिशत है।
सबसे अधिक वित्तीय दबाव में रहने वाले राज्य हैं —
पंजाब, हिमाचल प्रदेश, तमिलनाडु, केरल और हरियाणा।
इन राज्यों ने अपनी कुल आमदनी का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सिर्फ वेतन, पेंशन और ब्याज चुकाने में खर्च कर दिया है।

मुफ्त योजनाओं से बढ़ा बोझ

रिपोर्ट में बताया गया है कि केवल बिजली सब्सिडी पर 24 राज्यों ने 3.18 लाख करोड़ रुपये खर्च किए। वहीं, महिलाओं को नकद सहायता देने वाली योजनाओं पर 12 राज्यों ने 1.68 लाख करोड़ रुपये की राशि फूंक डाली।
राज्य सरकारें वोट बैंक की राजनीति के दबाव में ऐसी योजनाओं की होड़ में फंस गई हैं, जिससे उनकी वित्तीय स्थिति बिगड़ती जा रही है।

विकास योजनाएं ठप, निर्भरता बढ़ी

वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि मुफ्त योजनाओं की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण राज्यों के पास अब दीर्घकालिक निवेश और आधारभूत संरचना विकास के लिए धन नहीं बच रहा है। परिणामस्वरूप, उद्योगों में निवेश घटा है, रोजगार सृजन पर असर पड़ा है और केंद्र पर निर्भरता बढ़ी है।
केंद्र सरकार ने भी अब अनुदानों पर कई शर्तें लागू कर दी हैं, जिससे राज्यों की वित्तीय नीतियों की स्वतंत्रता सीमित होती जा रही है।

आरबीआई की सख्त चेतावनी

आरबीआई ने कहा है कि अगर यह “रेवड़ी कल्चर” नहीं रुका, तो राज्य न केवल आर्थिक संकट में फंस जाएंगे, बल्कि देश की समग्र वित्तीय स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है।

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