जो इंडिया/ठाणे : (Thane Lok Sabha Election)
ठाणे की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। लोकसभा चुनाव में शिंदे गुट (शिवसेना) के उम्मीदवार नरेश म्हस्के ने अप्रत्याशित जीत हासिल की है। इस जीत ने न केवल शिंदे को नई ऊर्जा दी है बल्कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गट) के वरिष्ठ नेता और सांसद राजन विचारे के राजनीतिक सफर को भी बड़ा झटका दिया है।
राजन विचारे, जो लंबे समय से ठाणे की राजनीति में मजबूत पकड़ बनाए हुए थे, इस बार अपनी हार पचा नहीं पा रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि परंपरागत वोट बैंक और जनता का विश्वास उनके साथ रहेगा, लेकिन चुनाव परिणामों ने सारे समीकरण बदल दिए।
क्यों हारे राजन विचारे?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा और शिवसेना(शिंदे गुट) के बीच अप्रत्यक्ष तालमेल, स्थानीय कार्यकर्ताओं का असंतोष, और बदलते राजनीतिक माहौल ने इस नतीजे को जन्म दिया। ठाणे के मतदाताओं ने पहली बार शिंदे गुट के उम्मीदवार को लोकसभा में भेजकर यह संदेश दिया है कि अब वे नई राजनीति और नए चेहरे चाहते हैं।
नरेश म्हस्के की जीत का महत्व
नरेश म्हस्के की जीत को शिंदे गुट के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है। लंबे समय से मर्यादित दायरे में सिमटी पार्टी को अब राज्यस्तर पर नई पहचान मिल सकती है। एकनाथ शिंदे और उनकी पार्टी के लिए यह जीत “संजीवनी” साबित हो सकती है।
आगे की राजनीति
ठाणे की इस हार-जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल मचा दी है। राजन विचारे की हार शिवसेना (उद्धव) के लिए बड़ा आघात है, वहीं नरेश म्हस्के की जीत से शिंदे गुट को लोकसभा में पहली बार बड़ी मजबूती मिली है। आने वाले समय में ठाणे ही नहीं बल्कि पूरे महाराष्ट्र की राजनीति में इस नतीजे के गहरे असर देखने को मिल सकते हैं।



