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वर्ली में बगावत की आहट, शिवसेना (UBT) के AB फॉर्म बने सिरदर्द, उद्धव ठाकरे को संभालना पड़ा मोर्चा

uddhav aaditya thackeray

जोइंडिया टीम/ मुंबई: मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट)

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में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है। पार्टी ने बिना किसी आधिकारिक सूची जारी किए सीधे उम्मीदवारों को AB फॉर्म बांट दिए, जिसके बाद खासकर माहिम और वर्ली विधानसभा क्षेत्रों में जबरदस्त असंतोष देखने को मिल रहा है। सबसे ज्यादा चर्चा आदित्य ठाकरे के वर्ली विधानसभा क्षेत्र को लेकर है, जहां टिकट बंटवारे ने पार्टी के भीतर बगावत जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, वार्ड नंबर 194 से उम्मीदवार तय किए जाने के बाद MNS नेता संतोष धुरी खासे नाराज़ बताए जा रहे हैं। इस वार्ड से शिवसेना (UBT) (ShivSena UBT)  ने MLA सुनील शिंदे के भाई निशिकांत शिंदे को उम्मीदवार बनाया है, जिससे राजनीतिक समीकरण और भी उलझ गए हैं।

वहीं, वर्ली विधानसभा क्षेत्र के वार्ड नंबर 196 को महिला आरक्षण के तहत खोलते हुए पार्टी ने डिपार्टमेंट हेड आशीष चेंबूरकर की पत्नी पद्मजा चेंबूरकर को उम्मीदवार घोषित कर दिया। इस फैसले के बाद पार्टी के कई वफादार पदाधिकारियों में नाराज़गी फैल गई है। इस वार्ड से आकर्षिका बेकल पाटिल, सूर्यकांत कोली और संगीता जगताप के नामों की जोरदार चर्चा थी, लेकिन टिकट किसी और को मिलने से असंतोष खुलकर सामने आया है।

सूत्रों का कहना है कि टिकट बंटवारे के बाद वर्ली विधानसभा क्षेत्र में शिवसैनिकों और पदाधिकारियों ने नेतृत्व के खिलाफ नाराज़गी जताई, जिससे ठाकरे गुट को अपने ही कार्यकर्ताओं से कड़ी चुनौती मिलने की आशंका है। यहां तक कि वार्ड नंबर 197 में कुछ नाराज़ पदाधिकारियों के MNS से संपर्क करने और इस्तीफे की धमकी देने की भी खबरें सामने आ रही हैं।

हालात की गंभीरता को देखते हुए शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) खुद मोर्चा संभालते नजर आ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, AB फॉर्म पाने वाले उम्मीदवारों और नाराज़ दावेदारों—दोनों को ही मातोश्री बुलाया गया है। वर्ली विधानसभा क्षेत्र में बढ़ती बगावत को थामने के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा सीधी बातचीत और समझाइश की जा रही है।

बताया जा रहा है कि हेमांगी वर्लीकर, जिन्हें पहले वार्ड नंबर 193 से मैदान में उतरना था, उन्हें भी सूर्यकांत कोली के इस्तीफे के बाद मातोश्री तलब किया गया। इससे साफ है कि पार्टी नेतृत्व हालात को नियंत्रण में लाने की हर संभव कोशिश कर रहा है।

रात के समय वर्ली में जिन उम्मीदवारों को AB फॉर्म सौंपे गए थे, उन्हें भी अब मातोश्री बुलाए जाने की खबर है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या आदित्य ठाकरे (Aaditya Thackeray) का गढ़ माने जाने वाला वर्ली विधानसभा क्षेत्र पार्टी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है?

आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि उद्धव ठाकरे की यह डैमेज कंट्रोल कवायद ठाकरे गुट की अंदरूनी बगावत को थाम पाती है या नहीं। फिलहाल, मुंबई की राजनीति में वर्ली से उठी यह हलचल महापालिका चुनाव की दिशा और दशा तय करती नजर आ रही है।

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