शौचालय का पानी ओवरफ्लो, यात्रियों को बस पकड़ते समय नाक बंद करनी पड़ रही है, सफाई व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
जो इंडिया / मुंबई: (Mumbai Municipal Corporation Cleaning Issue)
राज्य सड़क परिवहन निगम (एसटी) का मुंबई सेंट्रल डिपो, जो महाराष्ट्र राज्य परिवहन की पहचान माना जाता है, आज अपनी दुर्दशा और गंदगी के कारण बदनाम हो गया है। यह डिपो अब यात्रियों और कर्मचारियों दोनों के लिए परेशानी का केंद्र बन चुका है। डिपो के प्रवेश द्वार पर शौचालय का पानी ओवरफ्लो होकर सड़कों पर फैल गया है, जिससे पूरी जगह बदबू से बजबजा रही है। बस पकड़ने वाले यात्रियों को नाक बंद करके चलना पड़ रहा है।
प्रवेश द्वार से लेकर वर्कशॉप तक फैली गंदगी
डिपो का मुख्य प्रवेश द्वार सीवेज के गंदे पानी और शराब की बोतलों से भरा दिखाई देता है। परिसर के भीतर कर्मचारी विश्राम कक्ष के आसपास भी कचरे और प्लास्टिक की बोतलों का अंबार लगा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह डिपो राज्य का मुख्यालय है, जहां परिवहन मंत्री और एसटी निगम के अध्यक्ष प्रताप सरनाईक का कार्यालय भी स्थित है। बावजूद इसके, सफाई व्यवस्था का हाल बेहाल है।
स्थानीय लोगों और कर्मचारियों ने बताया कि कुछ महीने पहले भी यही समस्या उत्पन्न हुई थी। तब मीडिया में मामला उठने पर सफाई की गई थी, लेकिन यह केवल अस्थायी कदम साबित हुआ। सोमवार को फिर से वही गंदगी, वही दुर्गंध और वही लापरवाही देखने को मिली।
कूड़ेदान भरे पड़े, मलबा और मच्छरों का अड्डा
सूचना एवं प्रौद्योगिकी भवन के पास रखे बड़े-बड़े कूड़ेदान दिनों-दिन कचरे से भरते जा रहे हैं। नगर निगम द्वारा नियमित सफाई नहीं होने से यह कूड़ेदान अब बदबू के स्रोत बन गए हैं। भवन के पीछे मलबे के ढेर लगे हैं और वर्कशॉप क्षेत्र में कई जगह पानी जमा हो गया है। इन गड्ढों में मच्छरों का लार्वा तेजी से पनप रहा है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
कर्मचारियों ने बताया कि हर बार शिकायत करने के बाद ही सफाई होती है। नियमित रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं है। यात्रियों ने भी नाराजगी जताई कि “जहां से हजारों लोग रोज़ाना बसों में सफर करते हैं, वहीं इस तरह की गंदगी होना शर्म की बात है।”
स्वास्थ्य पर मंडरा रहा खतरा, प्रशासन बेपरवाह
डिपो की अस्वच्छ स्थिति कर्मचारियों और यात्रियों दोनों के लिए स्वास्थ्य संकट का कारण बनती जा रही है। डॉक्टरों का मानना है कि ऐसी जगहों पर लंबे समय तक काम करने या आने-जाने से सांस संबंधी बीमारियाँ और संक्रमण फैल सकता है। इसके बावजूद प्रशासन की उदासीनता बनी हुई है।
डिपो प्रबंधक का बयान और जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ना
मुंबई सेंट्रल डिपो के प्रबंधक वैभव कांबले ने कहा,
> “हमने मनपा को सूचित कर दिया है कि शौचालय का पानी ओवरफ्लो हो गया है। वे इसे साफ करा दें।”
हालांकि यात्रियों और कर्मचारियों का कहना है कि केवल सूचना देने से कुछ नहीं होगा। डिपो की साफ-सफाई के लिए स्थायी और नियमित व्यवस्था बनाई जानी चाहिए ताकि भविष्य में यह स्थिति न दोहराई जाए।
सरकार और निगम से जवाबदेही की मांग
अब यह सवाल उठ रहा है कि राज्य सरकार और परिवहन विभाग इस मामले को कब गंभीरता से लेगा। जिस डिपो से रोज़ाना हजारों बसें महाराष्ट्र के अलग-अलग कोनों में जाती हैं, उसकी यह स्थिति राज्य की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है। यात्रियों और कर्मचारियों ने मांग की है कि एसटी मुख्यालय को तत्काल स्वच्छ और सुरक्षित बनाया जाए, वरना आने वाले दिनों में यह गंदगी गंभीर स्वास्थ्य आपदा का रूप ले सकती है।
