वन विभाग ने दी पुलिस को सिफारिश, सिडको पर फर्जीवाड़े के आरोप, मंत्री संजय शिरसाट की बढ़ी मुश्किलें — विपक्ष का हमला तेज!
जो इंडिया / मुंबई: (Navi Mumbai land scam)
नवी मुंबई में एक बार फिर सत्ता के गलियारों को हिला देने वाला बड़ा भूमि घोटाला सामने आया है। शिंदे गुट की महायुति सरकार के शासनकाल में हुआ यह ₹1,400 करोड़ का जमीन घोटाला अब राज्य की राजनीति का सबसे बड़ा विस्फोटक मुद्दा बन गया है।
वन विभाग ने खुद अपने पत्र में स्वीकार किया है कि नवी मुंबई के पेन और उरण क्षेत्रों में सरकारी वन भूमि को सिडको की बताकर निजी व्यक्तियों को आवंटित किया गया।
इस खुलासे ने सरकार की नींव हिला दी है। मंत्री संजय शिरसाट पर गंभीर आरोप लगे हैं, जबकि विपक्ष के नेता रोहित पवार ने इसे “भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण” बताते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग की है।
सरकार ने खुद मानी गड़बड़ी — वन विभाग का बड़ा खुलासा
राष्ट्रवादी कांग्रेस (शरद पवार गुट) के विधायक रोहित पवार लंबे समय से सिडको घोटाले को लेकर सरकार पर हमला कर रहे थे।
अब वन विभाग ने पुलिस प्रशासन को भेजे पत्र में यह स्वीकार किया है कि 1,400 करोड़ रुपये की सरकारी जमीन की हेराफेरी हुई है।
वन विभाग ने कहा कि सिडको ने जिन भूखंडों को निजी लोगों को बांटा, वह वास्तव में वन भूमि थी।
इस मामले में पनवेल और उरण पुलिस थानों को पत्र भेजकर धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार का मामला दर्ज करने की सिफारिश की गई है।
घोटाले की जड़ें — वन भूमि को सिडको संपत्ति दिखाकर बांटा गया
रिपोर्ट के मुताबिक, नवी मुंबई के पेन और उरण क्षेत्र के आपटा, उलवे, सोनखार, तरघर, दापोली, कोपर और पारगांव डुंगी गांवों में यह घोटाला हुआ।
कुल 61,750 वर्गमीटर (12 भूखंड) जमीन का गलत तरीके से वितरण किया गया।
दस्तावेज़ों में हेराफेरी कर वन विभाग की जमीन को सिडको की संपत्ति बताकर एक व्यक्ति यशवंत नारायण बिवलकर को आवंटित कर दी गई।
यह पूरा मामला उस समय का है जब संजय शिरसाट सिडको के अध्यक्ष थे।
रोहित पवार का आरोप — “5,000 करोड़ की सरकारी संपत्ति बेची गई”
रोहित पवार ने पत्रकार परिषद में मुख्यमंत्री को 12,000 पन्नों के सबूत सौंपे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ ₹1,400 करोड़ नहीं, बल्कि ₹5,000 करोड़ तक की जमीन निजी व्यक्तियों में बांटी गई है।
> “सरकार जनता की संपत्ति को अपने नेताओं और उनके सहयोगियों में बाँट रही है। यह सिर्फ जमीन का नहीं, जनता के भरोसे का घोटाला है,”
— रोहित पवार, विधायक (NCP – शरद पवार गुट)
पुलिस पर राजकीय दबाव का आरोप — अब तक नहीं हुई एफआईआर
वन विभाग की चिट्ठी सामने आने के बाद भी अब तक पुलिस ने कोई मामला दर्ज नहीं किया है। इससे विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि कहीं पुलिस पर राजनीतिक दबाव तो नहीं है?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई वरिष्ठ अधिकारियों को मौखिक निर्देश दिए गए हैं कि “मामले को शांत रखा जाए” जब तक ऊपर से आदेश न आए।
💬 संजय शिरसाट का जवाब — “उम्र हो चली है, राजनीति से हटने का विचार”
वन विभाग के पत्र के वायरल होने के बाद मंत्री संजय शिरसाट ने मीडिया से कहा —
> “मेरी उम्र अब ज़्यादा हो गई है, मैं राजनीति से संन्यास लेने पर विचार कर रहा हूँ।”
लेकिन इस बयान ने विवाद को और भड़का दिया।
रोहित पवार ने पलटवार करते हुए कहा —
> “उम्र का बहाना बनाकर भागने की कोशिश मत करो। जनता की 5,000 करोड़ की जमीन जो निजी जेबों में डाली गई, उसका एक-एक इंच हिसाब देना पड़ेगा।”
वहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता अंबादास दानवे ने कहा —
“देश की जमीन लुटाने वालों को इनाम में कुर्सी दी जा रही है। यह सरकार की मिलीभगत और भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा उदाहरण है।”
राजनीतिक असर — महायुति में मचा सन्नाटा
वन विभाग के इस कबूलनामे ने महायुति सरकार को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है।
संजय शिरसाट के इस्तीफे की मांग अब तेज़ हो चुकी है।
मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर विपक्ष ने सवाल उठाते हुए कहा कि —
> “अगर सरकार में ईमानदारी है, तो तुरंत कार्रवाई की जाए।”
वहीं, सूत्रों का कहना है कि सरकार के भीतर ही इस घोटाले को लेकर तनाव बढ़ गया है, क्योंकि कई वरिष्ठ नेताओं के नाम जांच में सामने आने की संभावना है।



