जो इंडिया / मुंबई: देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में किराए के मकान (Rising rent in Mumbai) की समस्या बढ़ती जा रही है। मुंबई (Mumbai is the financial capital of the country) में चल रहे पुनर्विकास कार्यों ने एक नई मुसीबत खड़ी कर दी है। शहर के कई हिस्सों में मकानों के किराए में बेतहाशा वृद्धि देखी जा रही है। बांद्रा, खार, चेंबूर और मलाड जैसे इलाकों में किराए 50 से 65 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं, जिससे आम लोगों के लिए घर लेना बेहद मुश्किल हो गया है।
बिना योजना के पुनर्विकास से बढ़ी परेशानी
मुंबई में हजारों पुरानी इमारतों को तोड़कर नई इमारतों का निर्माण किया जा रहा है, लेकिन इनमें रहने वाले किरायेदारों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई है। डेवलपर्स द्वारा अस्थायी आवास के लिए जो किराया दिया जाता है, वह बाजार दर से काफी कम होता है। ऐसे में लोग मजबूरी में महंगे और छोटे घरों में रहने को विवश हैं।
प्रशासन की चुप्पी पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की ढीली नीतियों और पुनर्विकास में बिल्डरों को दी गई खुली छूट ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। महामारी के बाद से घरों की मांग में तेजी आई है, और अब पुनर्विकास की वजह से किराए के मकानों की संख्या घट रही है, जिससे किराए और भी बढ़ रहे हैं।
बिल्डर्स को फायदा, मुंबई की जनता परेशान
बांद्रा, खार और सांताक्रुज़ जैसे इलाकों में स्टूडियो अपार्टमेंट का किराया ₹25,000 से बढ़कर ₹50,000 तक पहुंच गया है, जबकि 1 बीएचके के लिए ₹75,000 तक देने पड़ रहे हैं। प्रॉपर्टी बाजार में रेंटल यील्ड दोगुनी हो चुकी है, जिसका सीधा लाभ बिल्डर्स और मकान मालिकों को मिल रहा है।
क्या आम आदमी के लिए बचेगा कोई विकल्प?
अगर यही हालात जारी रहे, तो आने वाले वर्षों में मुंबई में मध्यम वर्ग के लिए किफायती घर पाना नामुमकिन हो जाएगा। सरकार को चाहिए कि वह पुनर्विकास के लिए ठोस नीति बनाए और किराएदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करे, वरना यह संकट और भी गहराता जाएगा।



