जो इंडिया / मुंबई: (Maharashtra Politics)
महाराष्ट्र की महायुति सरकार के एक और मंत्री विवादों के घेरे में आ गए हैं। इस बार आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके पर यवतमाल जिले के रालेगांव तालुका में एक आदिवासी किसान की 25 एकड़ जमीन हड़पने का गंभीर आरोप लगा है। आरोप है कि आदिवासी समाज की पहली सूत मील स्थापित करने के नाम पर किसान की जमीन पर जबरन कब्जा किया गया।
यवतमाल जिला न्यायालय और मुंबई उच्च न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाली वरिष्ठ अधिवक्ता सीमा तेलंगे ने नागपुर प्रेस क्लब में आयोजित पत्रकार परिषद में मंत्री अशोक उईके पर कई गंभीर आरोप लगाए। एडवोकेट तेलंगे के अनुसार, मंत्री उईके एक “भूमाफिया” की तरह काम कर रहे हैं और देवधरी गांव में वर्ष 1951 से काश्तकार के रूप में खेती कर रहे आदिवासी किसान भुरबा कोवे की जमीन सूत मील के नाम पर हड़प ली गई। उन्होंने दावा किया कि आज भी किसान परिवार को जमीन के अधिकार छोड़ने के लिए धमकियां दी जा रही हैं।
क्या है पूरा मामला
एडवोकेट सीमा तेलंगे ने बताया कि रालेगांव तालुका के देवधरी गांव में मधुसूदन देशमुख की 25 एकड़ जमीन थी, जो काश्तकारी व्यवस्था के तहत आदिवासी किसान भुरबा कोवे को मिली थी। वर्ष 1950 से यह जमीन कोवे के कब्जे में थी और सात-बारा रिकॉर्ड में भी उनका नाम दर्ज था।
आरोप है कि वर्ष 2020 में अशोक उईके ने मूल मालिक देशमुख के वारिसों से यह जमीन खरीदी और तलाठी से मिलीभगत कर डिजिटल सात-बारा रिकॉर्ड से भुरबा कोवे का नाम हटवा दिया। इतना ही नहीं, कोवे के खेत में जेसीबी मशीन लगाकर फसल नष्ट करने, उनके बेटे, बेटी और दामाद के साथ मारपीट करने के आरोप भी लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार जब पुलिस में शिकायत दर्ज कराने पहुंचा, तो उनकी शिकायत लेने से भी इनकार कर दिया गया।
बेटी की नियुक्ति पर भी सवाल
एडवोकेट सीमा तेलंगे ने मंत्री उईके पर सत्ता के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के विशेषाधिकार का इस्तेमाल कर अपनी बेटी एडवोकेट प्रियदर्शनी उईके को मुंबई उच्च न्यायालय में सरकारी वकील नियुक्त करवाया। इस नियुक्ति के विरोध में नागपुर के संविधान चौक पर आदिवासी फेडरेशन द्वारा आंदोलन भी किया गया था। आरोप है कि सरकारी वकील बनने के तुरंत बाद प्रियदर्शनी उईके को यवतमाल नगराध्यक्ष पद के लिए भाजपा उम्मीदवार भी बनाया गया।
मंत्री का जवाब
इन सभी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए आदिवासी विकास मंत्री अशोक उईके ने कहा कि सूत मील की जमीन से जुड़ा मामला फिलहाल न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए इस पर टिप्पणी करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि एडवोकेट सीमा तेलंगे स्वयं वकील हैं, इसके बावजूद यदि उन्हें न्यायालयीन प्रक्रिया की समझ नहीं है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है। साथ ही उईके ने यह भी आरोप लगाया कि एडवोकेट तेलंगे के पीछे रालेगांव तालुका के एक पूर्व मंत्री का हाथ है।



