जो इंडिया / मुंबई। (Government strict on tainted leaders)
महाराष्ट्र सरकार ने दागी और दोषी जनप्रतिनिधियों को लेकर बड़ा फैसला लेते हुए साफ संदेश दिया है कि अब पद के नाम पर विशेष सम्मान नहीं मिलेगा। अपराध, भ्रष्टाचार या अन्य मामलों में दोषी ठहराए गए विधायक और सांसद अब सरकारी दफ्तरों में आम नागरिकों की तरह ही माने जाएंगे। अधिकारियों को उनके स्वागत में खड़े होने या विशेष प्रोटोकॉल देने की बाध्यता नहीं रहेगी।
महायुति सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी नए संशोधित आदेश में कहा गया है कि जिन जनप्रतिनिधियों को किसी आपराधिक या अन्य मामले में अदालत दोषी ठहरा चुकी है, उन्हें सरकारी कार्यालयों में किसी प्रकार का विशेष सम्मान नहीं दिया जाएगा। यदि ऐसे नेता किसी जांच, सुनवाई, अपील, चुनावी प्रक्रिया या अन्य कारणों से सरकारी दफ्तरों में पहुंचते हैं, तो उनके साथ सामान्य नागरिक जैसा व्यवहार किया जाएगा।
गौरतलब है कि इससे पहले 20 नवंबर 2025 को राज्य सरकार ने आदेश जारी कर सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्देश दिए थे कि विधायक और सांसद जब कार्यालयों में आएं, तो उनके सम्मान में खड़े हों। यहां तक कि ऐसा नहीं करने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी। इस फैसले के बाद सरकार को विपक्ष और जनता के भारी विरोध का सामना करना पड़ा था।
पुराने आदेश को लेकर यह सवाल उठे थे कि जिन नेताओं पर गंभीर अपराधों के आरोप हैं या जो दोषी साबित हो चुके हैं, उन्हें सरकारी सम्मान क्यों दिया जाए। लगातार बढ़ती आलोचना और किरकिरी के बाद सरकार ने अब अपना रुख बदल दिया है।
नए फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि जनप्रतिनिधि होने का अर्थ कानून से ऊपर होना नहीं है। यदि कोई नेता दोषी है, तो उसे किसी आम नागरिक की तरह ही सरकारी दफ्तरों में प्रक्रिया से गुजरना होगा।



