जो इंडिया / मुंबई। गणेशोत्सव (Ganesh Chaturthi) के दौरान समुद्र में होने वाले प्रदूषण को लेकर सरकार अब तेजी से हरकत में आ गई है। मुंबई उच्च न्यायालय (Mumbai High Court) में दिए गए हलफनामे के बाद सरकार ने संकेत दिए हैं कि बड़ी गणेश मूर्तियों के विसर्जन (Immersion of Ganesha idols) को लेकर एक व्यापक अध्ययन शुरू किया जाएगा। इस अध्ययन के तहत समुद्र में पीओपी मूर्तियों से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए नए विकल्प तलाशे जाएंगे।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, अध्ययन दल में पर्यावरणविद, समुद्री विशेषज्ञ और परंपरा के जानकारों को शामिल किया जाएगा। इस दौरान यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि मुंबई की 100 साल से अधिक पुरानी गणेशोत्सव परंपरा को कोई आघात न पहुंचे।
सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिया कि विसर्जन के पारंपरिक स्वरूप और पर्यावरण संरक्षण में संतुलन कायम रखने के लिए जो भी जरूरी कदम होंगे, उठाए जाएंगे। इस बीच पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि कृत्रिम तालाबों की संख्या और गुणवत्ता बढ़ाई जाए ताकि अधिक से अधिक मूर्तियां वहीं विसर्जित हों।
उल्लेखनीय है कि हर साल लाखों की संख्या में मुंबईकर गिरगांव चौपाटी सहित अन्य समुद्र तटों पर जाकर मूर्तियों का विसर्जन करते हैं। इनमें बड़ी मूर्तियां भी शामिल होती हैं, जिनमें पीओपी का इस्तेमाल होने से समुद्री जीव-जंतुओं पर बुरा असर पड़ता है।
