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Farming ruined due to rain: बेमौसम बरसात का फल-सब्जी और फसल की कीमतों पर पड़ेगा बुरा असर

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नवी मुंबई। पिछले कुछ दिनों से मुंबई सहित महाराष्ट्र के कई जिलों में बेमौसम (Farming ruined due to rain) बरसात और ओलावृष्टि ने जहां किसानों (farmers) की मुश्किलें बढ़ा दी हैं, वहीं फल-सब्जियों और अन्य फसलों को भी बड़ा नुकसान हुआ है। इस समय हरी सब्जियों (vegetable) के अलावा आम, संतरा, अंगूर, तरबूज, खरबूजा, पपीता, नींबू की फसल है। फसलों में गेहूं, चना, अरहर की कटाई का काम चल रहा है। व्यापारियों और किसानों की माने तो यह बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से उत्पादन पर असर पड़ेगा। इस बारिश के कारण फसलों की क्वालिटी थोड़ी हलकी हो जाएगी। इस साल अंगूर की खेती अच्छी हुई है जब कि हापुस तैयार हो रहे और अन्य आम के पेड़ो पर मोजर लगे हुए है।ऐसे में इस बरसात के कारण काफी नुकसान सहन करना पड़ सकता है। अब बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी है। इसके साथ ही दूसरे राज्यों में भी हुए बरसात के कारण गेहूं दाल और सब्जी की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।जिसके कारण कीमतों पर असर पड़ सकता है।
वाशी स्थित एपीएमसी मार्केट में सब्जी ,फल और अनाजों का आवक होता है । जिसमे महाराष्ट्र के कई जिलों दूसरे राज्यों से भी अनाज विक्री के लिए आता है। पिछले कुछ दिनों से हापुस आम का आवक तेजी से शुरू हुआ है। जब कि रायगढ़ जिले में अन्य आमो को मोजर लगा हुआ है ।इसके साथ ही नासिक से अंगूर का आवक भी शुरू हुआ है । फसल अच्छे होने से बाजार में आवक अधिक है जिसके कारण कीमतों में गिरावट हुई है। लेकिन अचानक हुए बेमौसम बरसात के कारण काफी फसल नुकसान हुआ है इसके साथ ही नासिक में ओला गिरने से अंगूर और अन्य सब्जियों पर भी असर पड़ा हुआ है। जो आने वाले समय में कीमतों पर असर पड़ सकता है फिलहाल हरी सब्जियों के दाम काबू में है। व्यापारियों का कहना है कि जल्दी मौसम साफ नहीं हुआ तो आगे सब्जियों के दाम पर असर देखने को मिल सकता है। थोक सब्जी कारोबारी ओमकार गुप्ता का कहना है कि गर्मी के मौसम में हरी सब्जियों की कमी हो जाती है। इस बार मार्च में कई उत्पादक क्षेत्रों में हो रही ओलावृष्टि से हरी सब्जियों की पैदावार घटने के आसार हैं।

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बेमौसम बरसात से गेंहू और दालों पर भी पड़ेगा असर

एपीएमसी के अनाज व्यापारी संदीप घनाते ने बताया कि वाशी एपीएमसी मध्य प्रदेश , गुजरात ,यूपी से अनाज आते है | जिसमे गेंहू , चावल , दाल आदि का समावेश होता है | इस साल जनवरी में गेहूं की कीमत रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी। इसे काबू में करने के लिए सरकार ने कई निर्णय लिया था। समय से पहले तापमान बढऩे से गेहूं किसान पहले ही चिंता में थे और अब बेमौसम बरसात और ओलावृष्टि ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी है। इससे गेहूं,दाल और सब्जी की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। बिगड़े मौसम एवं ओलावृष्टि से करीब 25 प्रतिशत फसल खराब हो गई है। इनमें गेहूं, चना, सरसों, आम, संतरा, पपीता से लेकर हरी सब्जियां शामिल है। कई राज्यों में 60 प्रतिशत गेहूं की कटाई हो चुकी है। कई राज्य में सरसों और चना, मसूर की कटाई चल रही है। जहां गेहूं की फसल खेतों में खड़ी है, उनको और कटकर खेतों में पड़ी हुई है, उन्हें ज्यादा नुकसान होने की संभावना है।

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