जो इंडिया / नई दिल्ली:
केंद्रीय चुनाव आयोग (Central Election Commission) ने मतदाता पहचान पत्र (वोटर आईडी) को आधार कार्ड से जोड़ने का बड़ा फैसला लिया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची में फर्जी वोटरों की पहचान करना और चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
चुनाव आयोग के अनुसार, कई मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत होते हैं, जिससे चुनावों में गड़बड़ी की आशंका बनी रहती है। आधार लिंकिंग से:
✅ फर्जी वोटर की पहचान होगी
✅ डुप्लिकेट मतदाता सूची को हटाया जाएगा
✅ मतदाता सूची अधिक पारदर्शी बनेगी
कैसे लिंक करें आधार और वोटर आईडी?
1. ऑनलाइन: राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल (NVSP) पर लॉगिन करके।
2. SMS द्वारा: निर्धारित नंबर पर संदेश भेजकर।
3. वोटर हेल्प सेंटर: निकटतम चुनाव कार्यालय में जाकर।
लिंकिंग अनिवार्य है या वैकल्पिक?
वर्तमान में यह प्रक्रिया स्वैच्छिक (optional) है, लेकिन चुनाव आयोग इसे अधिक प्रभावी बनाने के लिए सभी मतदाताओं को इसे जल्द से जल्द पूरा करने की अपील कर रहा है।
इस फैसले से चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जी मतदान पर रोक लग सकेगी।



