जो इंडिया / मुंबई: (Cyber fraud)
देशभर में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों के बीच मुंबई का एक चर्चित “डिजिटल अरेस्ट” साइबर फ्रॉड मामला अब मुंबई पुलिस और महाराष्ट्र के गृह विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। जिस साइबर गिरोह तक दुबई पुलिस महज दो दिनों में पहुंच गई और आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया, उसी मामले में मुंबई पुलिस एक वर्ष बीत जाने के बाद भी किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी है।
मामला दक्षिण मुंबई के कफ परेड निवासी डॉ. पद्माकर नांदेकर और उनके परिवार से जुड़ा है, जिनसे करीब 30 लाख रुपये की साइबर ठगी की गई थी। इस मामले में कफ परेड पुलिस थाने में वर्ष 2025 में एफआईआर क्रमांक 0251/2025 दर्ज की गई थी। हैरानी की बात यह है कि इसी साइबर गिरोह ने दुबई में डॉ. नांदेकर के भाई को भी निशाना बनाया था।
दुबई पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए बैंकिंग ट्रांजैक्शन, डिजिटल ट्रेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की और केवल 48 घंटे के भीतर दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक भारतीय नागरिक और एक स्थानीय निवासी शामिल बताए जा रहे हैं। इतना ही नहीं, दुबई पुलिस ने ठगी की गई रकम को भी ट्रैक कर उसके एक हिस्से की बरामदगी की प्रक्रिया शुरू कर दी।
वहीं दूसरी ओर, मुंबई में दर्ज इसी मामले की जांच अब तक किसी निर्णायक मुकाम तक नहीं पहुंच पाई है। इससे न केवल पीड़ित परिवार निराश है, बल्कि साइबर अपराधों से जूझ रहे आम नागरिकों में भी जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
डॉ. पद्माकर नांदेकर का कहना है कि उनके पास आरोपियों के नाम, पासपोर्ट की जानकारी, बैंक खातों का विवरण और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध हैं, जिन्हें जांच एजेंसियों को सौंपा जा सकता है। इसके बावजूद अब तक न तो किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई और न ही ठगी की रकम बरामद करने की दिशा में कोई ठोस प्रगति दिखाई दे रही है।
नांदेकर परिवार का आरोप है कि यदि दुबई पुलिस अंतरराष्ट्रीय साइबर गिरोह के नेटवर्क तक पहुंच सकती है, तो मुंबई पुलिस ऐसा क्यों नहीं कर पा रही है। परिवार ने महाराष्ट्र सरकार, गृह विभाग और साइबर अपराध जांच एजेंसियों से मांग की है कि दुबई में गिरफ्तार आरोपियों के भारत स्थित संपर्कों, सहयोगियों और वित्तीय नेटवर्क की तत्काल जांच कर कार्रवाई की जाए।
इस पूरे प्रकरण ने एक बार फिर मुंबई पुलिस की साइबर अपराध जांच क्षमता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कभी दुनिया की सबसे तेज पुलिस बलों में गिनी जाने वाली मुंबई पुलिस पर अब सुस्ती और लापरवाही के आरोप लग रहे हैं। पीड़ित परिवार का कहना है कि साइबर अपराध के मामलों में तेजी से कार्रवाई और जवाबदेही तय करना समय की मांग है, अन्यथा आम नागरिकों का भरोसा जांच एजेंसियों से उठ सकता है।
नांदेकर परिवार ने गृह विभाग से मांग की है कि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि जब विदेशी एजेंसियां आरोपियों तक पहुंच सकती हैं, तब मुंबई में दर्ज मामले में अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हो सकी।



