जो इंडिया / अहमदनगर, महाराष्ट्र:
प्रशासनिक कार्रवाई या धार्मिक भेदभाव?
मंदिर ट्रस्ट के ट्रस्टी अप्पासाहेब शेटे ने स्पष्ट किया कि यह कदम किसी भी प्रकार के धार्मिक या जातिगत पूर्वाग्रह से प्रेरित नहीं है। उन्होंने कहा, “बर्खास्तगी का कारण कर्मचारियों द्वारा किए गए कदाचार, प्रशासनिक अनियमितता और अनुशासनहीनता है।”
ट्रस्ट के अनुसार, कई कर्मचारी लंबे समय से काम में लापरवाही बरत रहे थे, और कई बार चेतावनी के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं हुआ। इसलिए यह सामूहिक निर्णय लेना पड़ा।
विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में आया फैसला
हालांकि, यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब भाजपा के आध्यात्मिक समन्वय मोर्चा के प्रमुख आचार्य तुषार भोसले ने मंदिर में मुस्लिम कर्मचारियों की नियुक्ति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन की घोषणा की थी। भोसले ने दावा किया था कि मंदिर में केवल हिंदू कर्मियों को ही नियुक्त किया जाना चाहिए, क्योंकि यह एक “हिंदू आस्था का केंद्र” है।
बर्खास्तगी का यह कदम भोसले के प्रस्तावित आंदोलन से ठीक एक दिन पहले लिया गया, जिससे यह संदेह पैदा हुआ है कि क्या यह प्रशासनिक निर्णय वास्तव में किसी राजनीतिक दबाव का परिणाम तो नहीं?
राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
घटना के बाद कई सामाजिक संगठनों और विपक्षी दलों ने इस निर्णय की निंदा की है और इसे धार्मिक भेदभाव करार दिया है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि अनियमितता का आधार था, तो जांच और व्यक्तिगत कार्यशैली के आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए थी, ना कि सामूहिक बर्खास्तगी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला आगामी स्थानीय चुनावों और धार्मिक ध्रुवीकरण के एजेंडे से भी जुड़ा हो सकता है।



