महाराष्ट्र में नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के चुनाव टालने के फैसले पर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा हैं। महाराष्ट्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष (Maharashtra Congress:) हर्षवर्धन सपकाल ने तीखा हमला बोलते चुनाव आयोग को खूब खरी खोटी सुनाई. उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब 30 नवंबर के बाद पूरे आठ दिन बीत गए, तो चुनाव आयोग अब अचानक कोर्ट के आदेश का हवाला देकर प्रक्रिया क्यों रोक रहा है? सपकाल ने आरोप लगाया कि 246 नगर पालिकाओं और 42 नगर पंचायतों में एक ही दिन मतदान हो रहा है, फिर भी 20 नगर पालिकाओं और कुछ वार्डों में चुनाव टालना हैरान करने वाला है और इससे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होते हैं।
<blockquote class=”twitter-tweet”><p lang=”mr” dir=”ltr”>मतदानाला २४ तास असताना निवडणुका स्थगित करणे अनाकलनीय; कोर्टाच्या निकालानंतर ८ दिवस आयोग झोपला होता काय? 3 डिसेंबरचा निकालही पुढे ढकला. <a href=”https://t.co/qigiKF0fem”>pic.twitter.com/qigiKF0fem</a></p>— Harshwardhan Sapkal (@INCHarshsapkal) <a href=”https://twitter.com/INCHarshsapkal/status/1995450362619216316?ref_src=twsrc%5Etfw”>December 1, 2025</a></blockquote> <script async src=”https://platform.twitter.com/widgets.js” charset=”utf-8″></script>
हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि चुनाव आयोग का काम निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से चुनाव कराना है, लेकिन हाल के वर्षों में आयोग अपने ही नियमों का पालन करने में विफल रहा है। लगभग दस साल बाद हो रहे इन लोकल बॉडी चुनावों में शुरुआत से ही भ्रम और अव्यवस्था दिखाई दी—एप्लीकेशन प्रक्रिया को कठिन बनाना, मतदाता सूची में भारी गड़बड़ी, मतदाताओं के नाम दो-दो और तीन-तीन बार दिखना, और आरक्षण से जुड़े कोर्ट आदेश के चलते कई नगर पंचायतों का भविष्य अनिश्चित होना। उन्होंने आरोप लगाया कि अब चुनाव टालकर नया कार्यक्रम घोषित करना कार्यकर्ताओं और मतदाताओं के साथ अन्याय है। साथ ही उन्होंने मांग की कि 3 दिसंबर के नतीजों का असर टाले गए चुनावों पर पड़ सकता है, इसलिए नतीजे 20 दिसंबर के मतदान के बाद ही घोषित किए जाएं।
नेशनल हेराल्ड मामले पर भी सपकाल ने केंद्र सरकार पर हमला बोला। दिल्ली पुलिस द्वारा सोनिया गांधी (Sonia Gandhi), राहुल गांधी (Rahul Gandhi) और कांग्रेस (Congress) नेताओं के खिलाफ दर्ज FIR को उन्होंने राजनीतिक साज़िश बताया। सपकाल के मुताबिक सरकार विपक्ष को दबाने और गांधी परिवार को बदनाम करने के उद्देश्य से एजेंसियों का दुरुपयोग कर रही है, जबकि वर्षों की जांच के बावजूद इस मामले में कुछ साबित नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि गांधी परिवार का त्याग और योगदान देश के इतिहास में दर्ज है, और उन पर इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करती है।
इसके साथ ही सपकाल ने सवाल उठाया कि जब सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ दावा करती है, तो करोड़ों के ज़मीन घोटाले में केंद्रीय मंत्री मुरलीधर मोहोल (Murlidhar Mohol) और उपमुख्यमंत्री अजित पवार के बेटे पार्थ पवार पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही? उनका कहना था कि सत्ता पक्ष से जुड़े मामलों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है, जबकि निशाना सिर्फ़ विपक्ष को बनाया जा रहा है।



