जो इंडिया / मुंबई। (Mumbai Metro Delay)
मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली मेट्रो सेवा गुरुवार सुबह एक बार फिर यात्रियों की नाराजगी का कारण बनी। पीक आवर के दौरान मुंबई मेट्रो वन की सेवाएं करीब 20 मिनट तक प्रभावित रहने से घाटकोपर-वर्सोवा कॉरिडोर के कई स्टेशनों पर भारी भीड़ जमा हो गई। प्लेटफॉर्म पर यात्रियों की लंबी कतारें लग गईं और ट्रेन में चढ़ने की होड़ में भगदड़ जैसी स्थिति बन गई।
सुबह दफ्तर जाने के समय अचानक मेट्रो सेवाएं धीमी पड़ने से सबसे ज्यादा परेशानी नौकरीपेशा लोगों को हुई। घाटकोपर, अंधेरी, साकीनाका, मरोल और वर्सोवा जैसे प्रमुख स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ बेकाबू नजर आई। कई लोग ट्रेन के दरवाजे खुलते ही अंदर घुसने की कोशिश करते दिखे, जबकि कुछ यात्रियों को अगली ट्रेन का इंतजार करना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्लेटफॉर्म पर इतनी भीड़ थी कि कई यात्रियों को चलने तक की जगह नहीं मिल रही थी। कुछ स्थानों पर सुरक्षा कर्मियों को भीड़ नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त मशक्कत करनी पड़ी। यात्रियों में गुस्सा साफ दिखाई दिया और सोशल मीडिया पर भी लोगों ने मेट्रो प्रशासन को जमकर खरी-खोटी सुनाई।
मुंबई मेट्रो वन प्रशासन ने देरी की वजह तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि रखरखाव कार्य को बताया। मेट्रो प्रबंधन के अनुसार, पटरियों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए बेंगलुरु मेट्रो के सहयोग से रातभर रेल ग्राइंडिंग का काम किया गया था। इसी कारण सुरक्षा मानकों के तहत अस्थायी स्पीड प्रतिबंध लगाए गए, जिससे ट्रेनों की आवाजाही धीमी रही और सेवाएं प्रभावित हुईं।
हालांकि यात्रियों का कहना है कि यदि पहले से सूचना दे दी जाती तो लोग वैकल्पिक साधनों का उपयोग कर सकते थे। लोगों ने सवाल उठाया कि ऐसे कार्य सप्ताह के व्यस्त दिनों में क्यों किए जाते हैं, जबकि सप्ताहांत या छुट्टी के दिन यह काम आसानी से हो सकता है।
अंधेरी से घाटकोपर यात्रा कर रहे यात्री सुनील सिंह ने कहा कि मेट्रो लेट होने की वजह से वे समय पर दफ्तर नहीं पहुंच सके। वहीं एक अन्य यात्री ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब शुक्रवार को बैंक अवकाश और उसके बाद लंबा वीकेंड था, तो यह काम उसी दौरान किया जा सकता था।
कई यात्रियों ने यह भी मांग की कि जिस तरह सेंट्रल और वेस्टर्न रेलवे मेगाब्लॉक से पहले अलर्ट जारी करते हैं, उसी तरह मेट्रो प्रशासन को भी पहले से यात्रियों को सूचित करना चाहिए।
गौरतलब है कि मार्च 2026 के अंत में भी आरे और बीकेसी के बीच तकनीकी खराबी के चलते मेट्रो सेवाएं करीब 30 मिनट तक प्रभावित हुई थीं। लगातार हो रही देरी और भीड़भाड़ की घटनाओं ने मुंबई मेट्रो की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब यात्रियों की मांग है कि मेट्रो प्रशासन केवल सुविधाओं के दावे न करे, बल्कि समयबद्ध सेवा, पारदर्शी सूचना व्यवस्था और बेहतर भीड़ प्रबंधन पर गंभीरता से काम करे, ताकि रोजाना लाखों यात्रियों को ऐसी परेशानी से न गुजरना पड़े।



