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Baby swap at Wadia Hospital: वाडिया अस्पताल में नवजात बच्चे को बदलने के मामले में डॉक्टरों और नर्सों के खिलाफ मामला दर्ज  

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मुंबई। (Baby swap at Wadia Hospital) एक महिला ने आरोप लगाया है कि वाडिया मैटरनिटी हॉस्पिटल(Wadia Maternity Hospital)में उसके नवजात बच्चे को बदल दिया गया। इस मामले में करीब पांच महीने बाद पुलिस ने अज्ञात डॉक्टरों और नर्सों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने कहा, अपने दावे की पुष्टि करने के लिए, परिवार ने एक निजी प्रयोगशाला में डीएनए परीक्षण कराया और बच्चे और मां के परिणाम नकारात्मक आए। हालांकि, परिवार के इस दावे को अस्पताल ने खारिज कर दिया था।

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शिकायतकर्ता का नाम सुनीता गंगाधर गंजेजी (41) है और वह दादर के कामगार नगर की रहने वाली है। सुनीता के पति एक कपड़ा निर्माण इकाई में काम करते हैं। दंपति की एक 16 साल की बेटी है। वे पिछले कुछ सालों से दूसरे बच्चे की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुनीता प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं कर पा रही थीं। इसलिए अंततः उन्होंने पराल के एक फर्टिलिटी क्लिनिक में आईवीएफ उपचार कराने का फैसला किया।

बच्चा नहीं दिखा

आईवीएफ ट्रीटमेंट के बाद सितंबर 2022 में सुनीता गर्भवती हो गईं। इसके बाद फरवरी 2023 से उनका इलाज पराल के नवरोसजी वाडिया मैटरनिटी हॉस्पिटल में होने लगा। उन्हें जून के पहले सप्ताह की तारीख दी गई थी। उन्होंने 7 जून की रात करीब 9 बजे एक बच्चे को जन्म दिया। लेकिन सुनीता ने दावा किया कि उसे बच्चे को जन्म देने के बाद कभी नहीं दिखाया गया। शुरू में उसे बताया गया कि वह कुछ समय से बेहोश थी। मां के पेट से मुंह, नाक और कान में पानी घुसने के कारण बच्चे का दम घुट गया, जिसके बाद उसे गहन चिकित्सा इकाई (आईसीयू) में स्थानांतरित कर दिया गया। उन्होंने दावा किया, लेकिन बच्चे को आईसीयू में ले जाने से पहले सुनीता के पति गंगाधर को बच्चा दिखाया गया।

डीएनए टेस्ट के बाद शक यकीन में बदल गया

लेकिन कुछ ही महीनों में सुनीता का शक और मजबूत हो गया कि ये बच्चा उसका नहीं है।आख़िरकार अगस्त महीने में उसने अस्पताल अधिकारियों से शिकायत की। उसने अधिकारियों के सामने संदेह जताया कि उसने एक लड़के को जन्म दिया है, लेकिन उसे एक लड़की सौंप दी गई। 7 जून को डिलीवरी के बाद बच्चा हमें नहीं दिखाया गया। सुनीता ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बच्चा बदल दिया। इस मामले में शक होने के बाद सुनीता ने अपना और अपनी नवजात बेटी का डीएनए एक निजी लैब में टेस्ट कराने का फैसला किया, लेकिन रिपोर्ट नेगेटिव आने के बाद उनका शक (बच्चा बदला गया) यकीन में बदल गया।

आखिरकार बुधवार को सुनीता ने भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। सुनीता की डिलीवरी के दौरान लेबर वार्ड में मौजूद डॉक्टरों और नर्सों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 336 (दूसरों के जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरे में डालने वाला कार्य) और 34 (सामान्य इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

हम उन सभी डॉक्टरों, वार्ड बॉय और नर्सों के बयान दर्ज कर रहे हैं जो उस (डिलीवरी) दिन अस्पताल में ड्यूटी पर थे। पुलिस ने कहा कि माता-पिता और बेटी दोनों के नमूनों के डीएनए परीक्षण के लिए कलिना में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला को एक पत्र भी भेजा गया है, जिससे मामले में कई चीजें स्पष्ट हो जाएंगी।

अस्पताल ने आरोपों से इनकार किया

इस बीच इन सभी मामलों में अस्पताल के समक्ष अपना पक्ष भी रखा गया है। शिशु के जन्म के बाद नवजात के शरीर पर एक टैग लगाया जाता है। वहीं, अस्पताल ने स्पष्ट किया है कि कोई ढिलाई नहीं बरती गई है और कहा गया है कि टैग बच्चे और मां पर तब तक लगा रहता है जब तक उन्हें छुट्टी नहीं मिल जाती।

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