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अपोलो ने 5 साल की कार दुर्घटना ग्रस्त बच्ची को बचाया, मल्टीडिसिप्लिनरी मेडिकल टीम ने जीवन रक्षक त्वरित और व्यापक उपचार किए

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नवी मुंबई। जन्मदिन का जश्न अत्यंत दुःखद घटना में बदल गया। एक 5 साल की बच्ची अपनी मां स्नेहा का जन्मदिन मनाकर अपने माता-पिता के साथ घर लौट रही थी। तभी एक एसयूवी ने उनकी कार को टक्कर मार दी, दुर्भाग्यवश पिता की दुर्घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई, नन्ही सी बच्ची और उसकी मां को नज़दीकी अस्पताल ले जाया गया। मां की हालत स्थिर थी, लेकिन उनकी बेटी को कई गंभीर चोटें आई थी, उसकी नाक और मुंह से काफी ज़्यादा खून बह रहा था और उसे सांस लेने में भारी तकलीफ हो रही थी। एडवांस्ड क्रिटिकल केयर के लिए बच्ची को अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ले जाया गया। अपोलो के आपातकालीन कक्ष में पहुंची तब यह बच्ची बेहोश और सदमे में थी। जांच में कई गंभीर चोटें पाई गईं, सिर और चेहरे की हड्डियों के फ्रैक्चर के साथ-साथ हाथ-पैरों के फ्रैक्चर, जबड़े, कलाई, कॉलरबोन में फ्रैक्चर और फेफड़ों में कई घाव हुए थे।

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डॉ. अभिजीत बागडे, क्लिनिकल लीड – पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर और जनरल पीडियाट्रिक्स, अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ने बताया,”यह मामला हमारे सामने आए आज तक के सबसे चुनौतीपूर्ण मामलों में से एक था। बच्ची की उम्र कम थी, उसे कई फ्रैक्चर हुए थे, काफी ज़्यादा खून बह चूका था और चोटें बहुत गंभीर और जटिल थीं। पूरे अस्पताल की शुभकामनाओं के साथ हमने उपचार शुरू किए। उम्र काफी कम होने की वजह से सिर-चेहरे और हाथ के फ्रैक्चर के लिए दो सर्जरी की गईं, जिनमें बहुत ही विशेष देखभाल दी गयी। सर्जरी के बाद, उसे पीडियाट्रिक इंटेन्सिव केयर यूनिट (PICU) में वेंटिलेशन सपोर्ट पर रखा गया और बहुत ही बारीकी से निगरानी की जा रही थी। अगले कुछ दिनों में, उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ; सर्जरी के दूसरे दिन उसे सांस लेने की नली हटाकर एक्सट्यूबेट किया गया ताकि वह खुद सांस ले सके। सावधानीपूर्वक निगरानी और मेडिकल मैनेजमेंट के साथ बच्ची की किडनी और लिवर के कार्य धीरे-धीरे सामान्य हो गए।‘’

डॉ.विनोद विज, सीनियर कंसल्टेंट प्लास्टिक सर्जरी और कॉस्मेटोलॉजी, अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई ने बताया,”इतनी छोटी बच्ची में चेहरे के फ्रैक्चर को रिकन्स्ट्रक्ट करना एक नाजुक प्रक्रिया है, और उसका फेसिअल स्ट्रक्चर अब बढ़ने की स्टेज में है उस पर कम से कम प्रभाव हो यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण था। हमारी टीम ने उसकी शक्ल और कार्यक्षमता को पहले की तरह करने के लिए सावधानीपूर्वक काम किया, और उसके बेहद सकारात्मक परिणाम मिले।”

बेबी की मौसी सुश्री समता गौड़ ने अपोलो हॉस्पिटल्स नवी मुंबई के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “अपोलो हॉस्पिटल्स की टीम का हम जितना भी धन्यवाद करे, कम है। इस चुनौतीपूर्ण समय में उनका तत्काल रिस्पॉन्स अमूल्य था। उन्होंने न केवल असाधारण मेडिकल देखभाल प्रदान की, बल्कि इस कठिन समय में भावनात्मक रूप से भी हमारा बहुत साथ दिया। मेरी भतीजी की जान बचाने के उन्होंने कड़े प्रयास किए जो हमारे लिए बहुत मायने रखते हैं। हम मीडिया के भी बहुत आभारी हैं। उनके कवरेज की वजह से, कई लोग दान करने के लिए आगे आए, और सही, ज़रूरी इलाज करवाने में उन्होंने हमें सक्षम बनाया।”

“उसकी पूरी रिकवरी के दौरान, उसके अंगों में सामान्य गति को बहाल करने के लिए उसे फिजियोथेरेपी करवानी पड़ी। 25 नवंबर को डिस्चार्ज होने के समय, वह अपनी बोलने की क्षमत वापस पा चुकी थी, बिना सहारे के बैठ सकती थी, और कम से कम सहायता के साथ चल सकती थी। घर पर फिजियोथेरेपी जारी रखने के लिए उसकी मां को प्रशिक्षित किया गया था। पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से उबरने में मनोवैज्ञानिक परामर्श ने भी उसकी बहुत मदद की।”

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