अभी ना जाओ छोड़कर कि दिल अभी भरा नहीं…
और देखते ही देखते Asha Bhosle αकी जिंदगी संघर्षों से शुरू होते-होते उपलब्धियों के शिखर तक जा पहुंची। साल 2011 में गुइंनेस book of World Records
The Black Eyed Peas ने उनकी आवाज को अपने संगीत में शामिल किया। यहाँ तक कि Kronos Quartet जैसे शास्त्रीय संगीत समूह ने R. D. Burman के गीतों को उनके साथ रिकॉर्ड किया और ग्रैमी नामांकन भी पाया। इसी साल 92 वर्ष की उम्र में, उन्होंने Gorillaz के साथ भी अपनी आवाज दी। लेकिन इस चमक के पीछे एक गहरा अकेलापन भी उनके साथ रहा. उपलब्धियों के साथ-साथ नियति ने उन्हें दुख भी बहुत दिए. समय के साथ-साथ आशा ताई अपने सबसे करीबियों को भी एक के बाद एक खोती चली गयीं. 2012 में उनकी बेटी वर्षा का 56 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनकी बेटी का इतनी कम उम्र में दुनिया छोड़कर चले जाना उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा झटका था. तीन साल बाद ही यानी 2015 में बेटा हेमंत भी कैंसर के चलते चल बसा. अपने दोनों बच्चों की मौत के बाद आशा ताई मानो पूरी तरह से टूट चुकी थी. 2022 में उनकी बड़ी बहन और भारत की कोकिला लता मंगेशकर, भारतीय संगीत की सबसे बड़ी आवाज, भी उन्हें छोड़कर चली गईं। बेटी के जाने के बाद, आशा ताई ने एक बार कहा था, ‘यह दर्द मेरी आखिरी सांस तक मेरे साथ रहेगा.’ उन्होंने कहा था, ‘इंसान को हमेशा दूसरों के साथ हँसना और अकेले में रोना चाहिए.’
चुपचाप शुरू हुआ रिश्ता शादी में बदल गया
एक समय था जब एक किशोर, R. D. Burman ने रेडियो पर उनकी आवाज सुनी और उनसे ऑटोग्राफ माँगा था. आशा ने बाद में उसे याद करते हुए कहा, ‘एक दुबला-पतला, चश्मा लगाए लड़का, तब वह स्कूल में था और आशा, दो बच्चों की अकेली माँ। वक्त बदला और वही लड़का, चुपचाप उन्हें फूल भेजने लगा। एक दिन, रिकॉर्डिंग के दौरान जब फूलों का गुलदस्ता आया, तो आशा ताई नाराज हो गईं, उन्होंने चिल्लाकर कहा, ‘ये कौन भेज रहा है?’ तभी गीतकार Majrooh Sultanpuri ने मुस्कुराते हुए इशारा किया, ‘यही है वो…’
वो रिश्ता, जो चुपचाप शुरू हुआ था, सालों बाद शादी में बदल गया, भले ही इसके लिए उन्हें कड़ा विरोध सहना पड़ा। लेकिन किस्मत ने यहाँ भी उनका साथ नहीं दिया और 54 साल की उम्र में ही बर्मन दा उन्हें छोड़कर चले गए।
तुममें वो बात नहीं जो लता दी में है!’
1950 और 60 के दशक में, दोनों बहनों के बीच का फर्क उनकी फीस में साफ दिखता था। जहाँ Lata Mangeshkar एक गाने के 500 रुपए मिलते थे, वहीं आशा को उसी काम के लिए सिर्फ 100 से 150 रुपए में ही खुश होना पड़ता था.जहाँ एक और लता दी अपनी पसंद से फिल्में और संगीतकार चुनती थीं वहीं आशा ताई को जो भी काम मिलता, उसे स्वीकार करना पड़ता था. उनके जीवन के बारे में लिखने वाले लेखक Raju Bharatan ने एक बार कहा था, ‘शुरुआत में आशा भोसले कोई चमत्कार नहीं थीं, वह सिर्फ एक संघर्ष करने वाली कलाकार थीं।’ यहाँ तक कि महान संगीतकार Naushad ने तो एक समय उन्हें यह कहकर नकार दिया था कि ‘उनमें वह बात नहीं है, जो सिर्फ लता में है।’ लेकिन फिर समय ने ऐसी करवट ली कि अपने जीवन के अंतिम वर्षों में नौशाद ने खुद माना कि वह आशा के साथ अन्याय कर बैठे थे।
हेलेन ने उनकी प्रतिभा को पहले ही भांप लिया था
जहाँ कुछ लोग उनकी काबिलियत नहीं पहचान पाए, वहीं बॉलीवुड की मशहूर डांसर Helen ने उनकी प्रतिभा बहुत पहले समझ लिया था. हेलेन हर रिकॉर्डिंग से पहले स्टूडियो जातीं, आशा ताई की आवाज को ध्यान से सुनतीं और फिर उसी के अनुसार अपनी नृत्य शैली तैयार करतीं। यहाँ नर्तकी, गायिका का अनुसरण करती थी।
लता दी ने कहा था, ‘अब बस हम दोनों ही बचे हैं’
जब दोनों बहनें छोटी थीं, तो Lata Mangeshkar अपने पहले ही दिन स्कूल से इसलिए लौट आई थीं क्योंकि उन्हें अपनी छोटी बहन आशा को साथ लाने की अनुमति नहीं मिली थी। और जीवन के अंतिम दिनों में उन्होंने आशा से कहा था, ‘सब चले गए किशोर दा, मुकेश जी, रफी दा…अब सिर्फ हम दो बहनें ही बची हैं…”
जहाँ जिंदगी की शुरुआत की यादें थीं, वहीं अंत की खामोशी भी
यह कहानी सिर्फ एक आवाज की नहीं यह उस हिम्मत की कहानी है, जो हर दर्द के बाद भी गाना नहीं छोड़ती। आशा भोसले की आवाज भले ही खामोश हो गयी हो लेकिन उनका संगीत हमेशा दिलों में गूंजता रहेगा..!



