ज्ञान, संस्कृति और भारतीय मूल्यों के संवर्धन का सशक्त केंद्र बनेगा नया सभागृह
जो इंडिया /नवी मुंबई (उलवे) – (MIT Vishwashanti Gurukul)
आधुनिक शिक्षा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के समन्वय का सजीव उदाहरण प्रस्तुत करते हुए एमआईटी विश्वशांति गुरुकुल, उलवे में नव-निर्मित ‘विश्वधर्मी विश्वनाथ सभागृह’ का भव्य उद्घाटन संपन्न हुआ। इस अवसर पर पद्मश्री परशुराम गंगावणे ने कहा कि एमआईटी विश्वशांति गुरुकुल केवल एक विद्यालय नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान-परंपरा, संस्कृति और नैतिक मूल्यों को विकसित करने वाला एक आदर्श शिक्षण केंद्र है।
उद्घाटन समारोह में पद्मश्री गंगावणे मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। यह उद्घाटन माईर्स एमआईटी शिक्षा समूह के संस्थापक अध्यक्ष विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ दा. कराड एवं सौ. उषा विश्वनाथ कराड के शुभ आशीर्वाद से पद्मश्री परशुराम गंगावणे तथा माईर्स एमआईटी की ट्रस्टी एवं महासचिव प्रो. स्वाती कराड चाटे के करकमलों द्वारा संपन्न हुआ।
इस अवसर पर पनवेल कृषि उत्पन्न बाजार समिति के पूर्व संचालक राजेंद्र पाटील, एमआईटी विश्वप्रयाग विश्वविद्यालय की परियोजना निदेशिका प्रो. प्रभा कासलीवाल, अण्णासाहेब टेकाळे, विश्वशांति गुरुकुल की प्रधानाचार्या अंशू सक्सेना, अकादमिक हेड शीतल वर्मा तथा मार्केटिंग एवं ऑपरेशन्स हेड प्रो. के. सी. मिश्रा सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।
भारतीय परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश
अपने संबोधन में पद्मश्री परशुराम गंगावणे ने कहा कि चित्रकथी और कठपुतली जैसी पारंपरिक कला विधाएं केवल मनोरंजन का साधन नहीं रही हैं, बल्कि समाज प्रबोधन और नैतिक शिक्षा का प्रभावी माध्यम रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे आधुनिक तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़े रहें और भारतीय कला परंपराओं को आगे बढ़ाएं।
दूरदृष्टि का प्रतीक है नया सभागृह
प्रो. स्वाती कराड चाटे ने अपने वक्तव्य में कहा कि संस्थापक विश्वधर्मी प्रो. डॉ. विश्वनाथ डी. कराड की दूरदृष्टि और मानवीय मूल्यों पर आधारित सोच का ही परिणाम है कि आज एमआईटी समूह वैश्विक स्तर की शैक्षणिक सुविधाएं प्रदान कर रहा है। उन्होंने बताया कि ‘विश्वधर्मी विश्वनाथ सभागृह’ केवल एक इमारत नहीं, बल्कि शिक्षा, कला, संस्कृति और सामाजिक चेतना का संगम स्थल होगा।
उन्होंने आगे कहा कि विश्वशांति गुरुकुल का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक रूप से उत्कृष्ट बनाना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक, सुसंस्कृत और जिम्मेदार नागरिक बनाना है। मूल्याधारित शिक्षा और सर्वांगीण विकास की दिशा में यह सभागृह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित सभागृह
नव-निर्मित सभागृह अत्याधुनिक ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था, विशाल मंच, आरामदायक बैठने की व्यवस्था तथा सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक कार्यक्रमों के लिए सभी आवश्यक संसाधनों से सुसज्जित है। यहां विद्यार्थियों के लिए विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संगोष्ठियां, कार्यशालाएं और शैक्षणिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
विद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह सभागृह विद्यार्थियों की रचनात्मकता को मंच प्रदान करेगा और उनके आत्मविश्वास व नेतृत्व क्षमता को विकसित करने में सहायक सिद्ध होगा।
कार्यक्रम के अंत में अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया और विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी दी गईं, जिन्होंने समारोह को और भी भव्य एवं प्रेरणादायक बना दिया।
