जो इंडिया/मुंबई। (Rani Mukerji First National Award 2025)
पिता को याद कर छलक उठीं भावनाएँ
रानी ने कहा—
“मैं सचमुच अभिभूत हूं। यह सम्मान मेरे लिए बेहद खास है। मेरे पिता हमेशा चाहते थे कि एक दिन मैं यह उपलब्धि हासिल करूं। आज उनका सपना पूरा हुआ है, लेकिन अफसोस कि वह इस पल को देख नहीं पाए। मुझे विश्वास है कि यह उनका आशीर्वाद और मेरी मां की ताक़त है, जिसने मुझे मिसेज चटर्जी की भूमिका निभाने में मदद की।”
प्रशंसकों और टीम का जताया आभार
अपनी भावनाओं को साझा करते हुए रानी मुखर्जी ने अपने प्रशंसकों का भी दिल से धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि उनके फैन्स ने हर सुख-दुख में साथ दिया है और यही अटूट समर्थन उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा रहा है।
इसके साथ ही उन्होंने फिल्म की निर्देशक असीमा चिब्बर, निर्माता निखिल आडवाणी, मोनिषा अडवाणी और मधु भोजवानी सहित पूरी टीम और भारत-एस्टोनिया के कास्ट-क्रू का आभार व्यक्त किया। रानी ने याद दिलाया कि कोविड काल की चुनौतियों के बीच यह फिल्म संभव हो पाना पूरी टीम के जज़्बे और मेहनत का नतीजा है।
मातृत्व की शक्ति को दिया सम्मान
रानी मुखर्जी ने इस पुरस्कार को दुनिया की हर मां को समर्पित किया। उन्होंने कहा कि मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे की कहानी ने उन्हें गहराई से छुआ क्योंकि यह एक प्रवासी मां की सच्ची कहानी है, जो अपने बच्चों की खातिर हर मुश्किल से लड़ती है। रानी के अनुसार, एक मां होने के नाते यह किरदार बेहद व्यक्तिगत था और उन्होंने इसके माध्यम से मातृत्व की अदम्य शक्ति को सम्मान देने का प्रयास किया।
एक खास मुकाम
रानी ने राष्ट्रीय पुरस्कार की ज्यूरी का भी आभार जताते हुए कहा,
“यह फिल्म और यह पल मेरे दिल में हमेशा एक खास जगह रखेगा। यह सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उन सभी महिलाओं के लिए भी है जो अपने परिवार और बच्चों के लिए हर दिन संघर्ष करती हैं। यह सम्मान उन्हें समर्पित है।”



