जो इंडिया/नाशिक। (Trimbakeshwar journalist attack
घटना कैसे घटी
जानकारी के अनुसार, आगामी कुंभमेले से संबंधित संत-समागम की कवरेज के लिए कुछ पत्रकार नाशिक से त्र्यंबकेश्वर पहुंचे थे। वहां प्रवेश करने वाले श्रद्धालुओं से टोल शुल्क लिया जा रहा था। पत्रकारों ने कई बार स्पष्ट किया कि वे समाचार कवरेज के लिए आए हैं और मीडिया प्रतिनिधि हैं। इसके बावजूद टोल वसूलने वालों ने उनकी बात अनसुनी की।
मारपीट में घायल हुए पत्रकार
स्थिति तब बिगड़ी जब पत्रकारों ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर संपर्क साधने की कोशिश की। इसी दौरान टोल वसूलने वालों ने अचानक उन पर हमला कर दिया। इस मारपीट में ज़ी 24 तास के योगेश खरे, पुढारी न्यूज़ के किरण ताजणे, अभिजीत सोनवणे और अन्य दो पत्रकार घायल हो गए। घायलों में से एक पत्रकार का इलाज फिलहाल त्र्यंबकेश्वर के सरकारी अस्पताल में जारी है।
जिलाधिकारी का आश्वासन और पत्रकारों की शंका
हमले के बाद जिलाधिकारी ने दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन तो दिया है, लेकिन पत्रकार संगठनों का मानना है कि पहले भी ऐसे मामलों में कार्रवाई अधूरी रही है। इसलिए इस बार मुख्यमंत्री से सीधा हस्तक्षेप करने की मांग की गई है, ताकि पत्रकारों को न्याय मिल सके।
पत्रकार सुरक्षा कानून पर सवाल
देशमुख ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने वर्ष 2019 में पत्रकार सुरक्षा कानून पारित किया था। लेकिन सात साल बीत जाने के बाद भी यह कानून कागजों तक सीमित है, क्योंकि इसकी अधिसूचना अब तक जारी नहीं की गई है। यही कारण है कि राज्य में पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। परिषद ने मांग की है कि सरकार तत्काल अधिसूचना जारी कर इस कानून को लागू करे।
निंदा प्रस्ताव और पत्रकार संगठनों का ऐलान
हमले के खिलाफ जारी किए गए निंदा प्रस्ताव पर परिषद अध्यक्ष मिलिंद अष्टिवकर, किरण नाईक, शरद पाबाळे, शिवराज काटकर, सुरेश नाईकवाडे, मन्सूरभाई शेख तथा डिजिटल मीडिया कौन्सिल के अध्यक्ष अनिल वाघमारे ने हस्ताक्षर किए हैं।
पत्रकार संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर दोषियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई और पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने में देरी की गई, तो राज्यव्यापी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
