जो इंडिया / मुंबई। देश की आर्थिक राजधानी मुंबई (Mumbai is the financial capital of the country
शिंदे ने बताया कि पानी, सड़क, स्कूल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं पर पिछले दस वर्षों में शिकायतों की संख्या में बड़ा इजाफा हुआ है। मई 2025 में प्रज्ञा फाउंडेशन द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 से 2024 तक मुंबई में नागरिक सुविधाओं को लेकर 70 प्रतिशत अधिक शिकायतें दर्ज हुईं।
सबसे चिंताजनक स्थिति कचरा प्रबंधन की है। रिपोर्ट के अनुसार, सॉलिड वेस्ट (कचरा) से जुड़ी शिकायतों में 380 प्रतिशत की बेतहाशा वृद्धि हुई है। यही नहीं, प्रदूषण से जुड़ी शिकायतों में 334 प्रतिशत और शौचालय संबंधी शिकायतों में 218 प्रतिशत का उछाल देखा गया है। वर्ष 2024 में ही नागरिकों ने कुल 1 लाख 15 हजार 396 शिकायतें दर्ज कराईं।
मुंबई के शौचालयों की स्थिति भी शर्मनाक है। महानगर में कुल 1,59,036 शौचालय ही मौजूद हैं। यानी हर 46 पुरुष और 38 महिलाओं के हिस्से में महज 1 शौचालय आता है। झुग्गियों में रहने वाले लोगों को प्रतिदिन केवल 45 लीटर पानी ही मिल पा रहा है, जबकि शहर को रोजाना 4,370 मिलियन लीटर पानी की आपूर्ति होती है। इसमें से करीब 395 मिलियन लीटर पानी रोजाना रिसाव के कारण बर्बाद हो रहा है।
मुंबई की नागरिक सुविधाओं पर यह रिपोर्ट साफ करती है कि नगर निकाय और सरकार के तमाम दावों के बावजूद शहर में बुनियादी ढांचे की हालत लगातार बिगड़ रही है। कचरे का ढेर, रिसता पानी और घटिया शौचालय व्यवस्था मुंबईकरों की दिनचर्या में परेशानी का सबब बने हुए हैं।
नागरिक संगठनों ने सरकार से मांग की है कि इन समस्याओं का जल्द समाधान निकाला जाए और मुंबई की सूरत संवारी जाए ताकि देश की आर्थिक राजधानी का सम्मान बरकरार रह सके।
