जो इंडिया / कल्याण– (Sachin Pote political controversy)
राजनीतिक और स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब सचिन पोटे स्वयं कांग्रेस में रहते हुए नगरसेवक गट नेता और बाद में ज़िला अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे, तब संगठन को मजबूत करने की ज़िम्मेदारी भी उन्हीं पर थी। कार्यकर्ताओं के अनुसार,
यदि संगठन कमजोर था, तो उसे सशक्त करने का प्रयास उसी समय क्यों नहीं किया गया?
कांग्रेस में रहते हुए उन्हें कई वर्षों तक संगठनात्मक जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। नगरसेवक गट नेता का पद केवल सम्मान का नहीं, बल्कि संगठन विस्तार, कार्यकर्ताओं को जोड़ने और जमीनी स्तर पर पार्टी को मजबूत करने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला होता है। आलोचकों का कहना है कि
जिस दौर में कांग्रेस कमजोर हुई, उसी समय सचिन पोटे प्रभावशाली पदों पर थे।
इन सवालों के बीच सचिन पोटे द्वारा कांग्रेस को ‘राम-राम’ कहकर शिंदे गुट की शिवसेना में प्रवेश किए जाने के बाद यह चर्चा और गहराती जा रही है कि
यदि संगठन की कमजोरी ही समस्या थी, तो उसे सुधारने का प्रयास क्यों नहीं किया गया?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे बयान संगठनात्मक असफलताओं से ध्यान हटाने और नई पार्टी में अपनी भूमिका को सही ठहराने की कोशिश भी हो सकते हैं।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सचिन पोटे नई पार्टी में संगठन को मजबूत कर कोई ठोस उदाहरण प्रस्तुत करते हैं या फिर यह बयान केवल शब्दों तक ही सीमित रह जाता है।



