जो इंडिया / ज्योति दुबे | नवी मुंबई: (Satyug Aagman Saket Mahayagya 2025-26)
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नवी मुंबई की पावन धरती पर आध्यात्मिक चेतना का विराट संगम देखने को मिल रहा है। परम पूज्य सद्गुरु श्री दयाल जी महाराज की अनंत कृपा एवं दिव्य मार्गदर्शन से ऐतिहासिक और अलौकिक “सतयुग आगमन साकेत महायज्ञ 2025-26” का शुभारंभ 24 दिसंबर 2025 को भव्य रूप से किया गया। यह महायज्ञ आगामी 3 जनवरी 2026 तक गामी इंडस्ट्रियल पार्क, नवी मुंबई में आयोजित किया जा रहा है।
इस दिव्य महायज्ञ में देश के कोने-कोने से लाखों की संख्या में श्रद्धालु, संत-सेवक और गुरु भक्तों के पहुंचने की संभावना है। यज्ञ स्थल पर भक्तों की आस्था, भक्ति और श्रद्धा देखते ही बनती है। प्रतिदिन प्रातः से संध्या तक यज्ञ अग्नि में आहुतियां अर्पित की जा रही हैं, जिससे संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओत-प्रोत हो उठा है।
आयोजकों के अनुसार, यह महायज्ञ केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक जागरण, मानवीय मूल्यों और सतयुगीन चेतना के पुनर्स्थापन का महापर्व है। सद्गुरु श्री दयाल जी महाराज के सान्निध्य में आयोजित यह चौथा महायज्ञ है, जिसे लेकर भक्तों में विशेष उत्साह और भावनात्मक जुड़ाव देखने को मिल रहा है।
महायज्ञ के दौरान भक्ति, ध्यान, सत्संग, प्रवचन एवं सेवा से जुड़े विविध कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों का उद्देश्य न केवल आत्मिक शांति प्रदान करना है, बल्कि समाज में प्रेम, करुणा, सद्भाव और सत्य की भावना को सुदृढ़ करना भी है। गुरु महाराज के दिव्य संदेश श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की प्रेरणा दे रहे हैं।
महायज्ञ की व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सेवादल के सैकड़ों स्वयंसेवक दिन-रात सेवा में तत्पर हैं। सुरक्षा, स्वच्छता, जल, चिकित्सा एवं अनुशासन की व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आयोजक मंडल ने बताया कि महायज्ञ में प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक श्रद्धालु सहभाग कर सकते हैं। इसके साथ ही सभी आने वाले भक्तों के लिए निःशुल्क महाप्रसाद की भी भव्य व्यवस्था की गई है।
कुल मिलाकर, “सतयुग आगमन साकेत महायज्ञ 2025-26” नवी मुंबई ही नहीं, बल्कि पूरे देश के श्रद्धालुओं के लिए एक दिव्य, दुर्लभ और अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बनता जा रहा है, जहाँ एक मन, एक श्रद्धा और एक भक्ति के साथ लाखों लोग सहभागी होकर सतयुगीन चेतना की अनुभूति कर रहे हैं।



