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The last 60 seconds before the accident: बारामती रनवे पर क्या हुआ था? लैंडिंग क्लियरेंस, रीडबैक की चूक और फिर अचानक विस्फोट

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जो  इंडिया / मुंबई: (The last 60 seconds before the accident)

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बारामती विमान हादसे को लेकर नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। उपमुख्यमंत्री अजित पवार (Deputy Chief Minister Ajit Pawar) की इस दर्दनाक दुर्घटना ने न सिर्फ महाराष्ट्र बल्कि पूरे देश को सदमे में डाल दिया है। अब जो जानकारी सामने आई है, वह हादसे से ठीक आख़िरी 60 सेकंड पर केंद्रित है—वही एक मिनट, जिसने सब कुछ बदल दिया।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से जुड़े सूत्रों के अनुसार, विमान जब रनवे 11 की ओर अंतिम चरण में था, तब हालात सामान्य माने जा रहे थे। मौसम विभाग की रिपोर्ट में न तो तेज़ हवा दर्ज थी और न ही घना कोहरा। फिर भी पायलट द्वारा यह कहना कि “रनवे दिखाई नहीं दे रहा”, कई सवाल खड़े करता है।
पहले गो-अराउंड के बाद जब विमान ने दोबारा फाइनल अप्रोच लिया, तब एटीसी पूरी तरह अलर्ट मोड में था। पायलट और एटीसी के बीच लगातार संवाद चल रहा था। कुछ ही पलों में पायलट की ओर से संदेश आया—
“रनवे विज़ुअल में है।”
इसके तुरंत बाद 8:43 बजे लैंडिंग की अनुमति दी गई। लेकिन यहीं एक अहम तकनीकी बिंदु सामने आता है—

लैंडिंग क्लियरेंस का रीडबैक नहीं मिला।
एविएशन विशेषज्ञों के मुताबिक, रीडबैक न मिलना सामान्य स्थिति नहीं मानी जाती। यह या तो कम्युनिकेशन फेलियर, कॉकपिट में अचानक आई किसी समस्या, या फिर पायलट की अत्यधिक व्यस्तता की ओर इशारा कर सकता है।
इसके ठीक एक मिनट बाद, 8:44 बजे, रनवे 11 के थ्रेशहोल्ड के पास एटीसी टावर से आग की ऊँची लपटें देखी गईं। कुछ ही सेकंड में यह स्पष्ट हो गया कि विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुका है। धमाके की आवाज़ दूर तक सुनाई दी और रनवे क्षेत्र में धुएं का घना गुबार छा गया।
दमकल और आपातकालीन सेवाएं तत्काल मौके पर पहुंचीं, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। विमान का मलबा रनवे के बाईं ओर बिखरा मिला, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि लैंडिंग के समय विमान संतुलन खो बैठा या थ्रेशहोल्ड से पहले ज़ोरदार टकराव हुआ।

अब जांच एजेंसियां इन बिंदुओं पर खास फोकस कर रही हैं—
* रनवे दिखाई देने के बावजूद लैंडिंग में चूक क्यों हुई?
* क्या आख़िरी क्षणों में तकनीकी अलार्म सक्रिय हुए थे?
* ब्लास्ट इम्पैक्ट के कारण हुआ या हवा में ही कोई गड़बड़ी थी?
ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर से इन सवालों के जवाब मिलने की उम्मीद है। फिलहाल, बारामती हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि एविएशन सेफ्टी और सिस्टम पर एक बड़ा सवाल बन चुका है।

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